BMC Election Result 2026: कौन हैं BJP नेता रोहिदास लोखंडे, जिन्होंने डॉन Arun Gawli की बेटी को हरा दिया चुनाव
BMC Elections Result 2026 Ward 207: बीएमसी चुनाव परिणाम 2026 में मुंबई के बायकुला-चिंचपोकली इलाके से एक चौंकाने वाला नतीजा सामने आया है। कभी अंडरवर्ल्ड और बाद में राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अरुण गवली की बेटी योगिता गवली (Arun Gawli daughter Yogita Gawli) को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है।
वार्ड नंबर 207 से चुनाव लड़ रहीं योगिता गवली, बीजेपी उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे से मुकाबला हार गईं। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि इस बार मतदाताओं ने नाम और विरासत से ज्यादा भरोसा स्थानीय चेहरे और पार्टी संगठन पर जताया।

योगिता गवली की उम्मीदों को क्यों लगा झटका?
योगिता गवली ने अखिल भारतीय सेना (एबीएस) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। प्रचार के दौरान वह पूरी तरह एक्टिव रहीं और अपने पिता अरुण गवली के पुराने प्रभाव वाले इलाकों में लगातार जनसंपर्क करती नजर आईं। माना जा रहा था कि गवली परिवार की पकड़ उन्हें बढ़त दिला सकती है, लेकिन नतीजे उम्मीद के बिल्कुल उलट रहे। करीबी मुकाबले में योगिता गवली को हार झेलनी पड़ी और उनकी यह पहली चुनावी कोशिश सफल नहीं हो सकी।
कौन हैं बीजेपी के विजेता उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे (Who is Rohidas Lokhande)
रोहिदास लोखंडे भारतीय जनता पार्टी के अनुभवी स्थानीय नेता हैं। उन्होंने वार्ड 207 से जीत दर्ज कर बीएमसी में नगरसेवक के रूप में एंट्री ली है। खास बात यह है कि साल 2017 के बीएमसी चुनाव में इसी वार्ड से उनकी पत्नी सुरेखा रोहिदास लोखंडे बीजेपी की ओर से जीत हासिल कर चुकी थीं। यानी यह इलाका पहले से ही लोखंडे परिवार और बीजेपी के लिए जाना-पहचाना रहा है।
शैक्षणिक रूप से रोहिदास लोखंडे 12वीं पास हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह पेशे से बिजनेसमैन हैं और उनकी संपत्ति करोड़ों रुपये में बताई जाती है। स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ और संगठन के भरोसे उन्होंने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले को अपने नाम कर लिया।
अरुण गवली का नाम और राजनीतिक विरासत
अरुण गवली, जिन्हें मुंबई में 'डैडी' के नाम से जाना जाता है, कभी अंडरवर्ल्ड की दुनिया का बड़ा चेहरा रहे हैं। 17 जुलाई 1955 को अहमदनगर जिले के कोपरगांव में जन्मे गवली का बचपन संघर्षों में बीता। मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़कर वह अपराध की दुनिया में चले गए। 1990 के दशक में उन्होंने राजनीति का रुख किया और साल 2004 में अखिल भारतीय सेना बनाकर चिंचपोकली से विधायक बने।
हालांकि 2008 में एक हत्या के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और वह करीब 17 साल जेल में रहे। साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। बीएमसी चुनाव 2026 में उनकी बेटी योगिता गवली को उतारकर परिवार ने राजनीतिक वापसी की कोशिश की, लेकिन वार्ड 207 के नतीजों ने इस कोशिश पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया।












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