BMC Election से पहले टूटा MVA गठबंधन, कांग्रेस ने बनाई दूरी, ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी क्या होगी कामयाब?
BMC election 2026: महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों में महाविकास आघाडी (MVA) को सिर्फ 50 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। सत्तारूढ़ महायुति के कुल 214 महापौर उम्मीदवार विजयी हुए हैं। हालांकि एमवीए के भीतर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है, इसके 30 महापौर निर्वाचित हुए। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) के 10-10 महापौर उम्मीदवार ही विजयी रहे।
इन चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, महाराष्ट्र 29 महानगरपालिकाओं के साथ मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं लेकिन MVA के भीतर बड़ी टूट हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने BMC चुनाव अकेले दम पर लड़ने के संकेत दे दिए हैं। पार्टी अध्यक्ष नाना पटोले ने कह दिया है कि कांग्रेस मुंबई में अकेले बीएमसी चुनाव लड़ने की ताकत रखती है। वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संभावित गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं। जिसके चलते महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।

उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे अगर साथ महानगरपालिका चुनाव लड़ते हैं तो इसे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ी घटना माना जाएगा। याद रहे राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' में उनसे मुलाकात की थी, जिसने इन अटकलों को और हवा दी है। इसके अलावा बीते कुछ महीनों से दोनों परिवार और ठाकरे ब्रदर्स कई मोकों पर कई बार साथ नजर आए।
ठाकरे ब्रदर्स क्यों साथ लड़ना चाहते हैं चुनाव?
MVA का मुख्य आधार भले ही धर्मनिरपेक्षता था, लेकिन अब हर घटक दल अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हितों को साधने में लगा हुआ है। ठाकरे ब्रदर्स की पार्टियों के बीच गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बालासाहेब ठाकरे की विरासत को एक साथ मिलकर आगे बढ़ाना और शिवसेना के पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करना है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना का मानना है कि दोनों भाई साथ मिलकर भाजपा और शिंदे शिवसेना का कड़ी टक्कर पाएंगे।
कांग्रेस अकेले क्यों लड़ना चाहती है BMC चुनाव?
वहीं कांग्रेस का मानना है कि मुंबई में उसका मजबूत जानाधार है और वह इस चुनाव में अपनी खोया हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल कर लेंगी। हालांकि अधिक सीटों पर जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस, प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ हाथ मिलाने की संभावना तलाश रही है। इस संभावित गठबंधन की पृष्ठभूमि में मुंबई कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर से मुलाकात की है।
BMC चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी क्या होगी कामयाब?
ध्यान रहे उद्धव ठाकरे की शिवसेना का राजनीतिक भविष्य इस महानगपालिका खासकर मुंबई के बीएमसी चुनाव पर टिका है क्योंकि 30-35 सालों से इस पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का दबदबा रहा है। ये चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए यह अपने अस्तित्व और विरासत की लड़ाई है, जबकि राज ठाकरे अपनी पार्टी को मजबूत करने का अवसर देख रहे हैं।
हालांकि हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनाव और पिछले विधानभा चुनव में राज ठाकरे की मनसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई है तो वो बीएमसी चुनाव में साथ देकर मनसे उद्धव ठाकरे की शिवसेना को फायदा दिला पाएगी, इसकी संभावना कम ही नजर जा रही है।
भाजपा को क्या मिलेगा MVA की टूट का फायदा?
कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले ने MVA की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी भाजपा को रोकने के लिए बना यह गठबंधन अब आंतरिक कलह से जूझता रहा है। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और इस अस्थिरता का फायदा उठाना चाहती है। उसकी रणनीति MVA को कमजोर करने और उद्धव-राज ठाकरे को एक होने से रोकने की है।
भाजपा का मुख्य लक्ष्य किसी भी कीमत पर बीएमसी पर कब्जा करना है, क्योंकि पिछले 30-35 सालों से इस पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का दबदबा रहा है। मुंबई में भाजपा का भी मजबूत जनाधार है इसलिए वो शिंदे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर बीएमसी चुनाव को लेकर साथ आगे बढ़ रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट के बाद ये पहला बीएमसी चुनाव है। महायुति में शामिल शिंदे गुट वाली शिवसेना और भाजपा मिलकर ठाकरे शिवसेना का पुराना वर्चस्व खत्म करने का दम रखती है।












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