महाराष्ट्र में बिगड़ सकता है बीजेपी का गणित, PVM से MVA की हो रही है डील, क्या होगा असर? जानिए

महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण बनता नजर आ रहा है। मुंबई में गुरुवार और शुक्रवार को होने वाली इंडिया गठबंधन की तीसरी बैठक से पहले राज्य में सत्ताधारी बीजेपी गठबंधन को बड़ा झटका देने की तैयारी चल रही है। वहां 13 छोटे-छोटे दलों के गठबंधन प्रगतिक विकास मंच (पीवीएम) के महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के साथ जुड़ने की चर्चा है।

राज्य में सत्ताधारी भाजपा गठबंधन के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। क्योंकि, प्रगतिक विकास मंच राज्य के उन इलाकों में अधिक प्रभावी माना जाता है, जहां उसके साथ और एमवीए या इंडिया गठबंधन की लड़ाई कांटे की हो सकती है।

maharashtra pvm with mva

इंडिया गठबंधन को मिल सकता है पीवीएम का साथ
जानकारी के मुताबिक एनसीपी संस्थापक शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) के अगुवा उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाला महा विकास अघाड़ी ने 13 पार्टियों के प्रगतिक विकास मंच को अपने साथ जुड़ने के लिए तैयार कर लिया है। इंडिया गठबंधन की अगली बैठक से पहले बीजेपी-विरोधी विपक्षी दलों के लिए महाराष्ट्र में इससे बड़ा क्या तोहफा हो सकता है, जहां यूपी की 80 सीटों के बाद लोकसभा की सबसे ज्यादा 48 सीटें हैं।

पीवीएम की पहले बीआरएस के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की थी चर्चा
दोनों तरफ से हो रही बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक पीवीएम बीजेपी के खिलाफ एमवीए के साथ हाथ मिलाने को तैयार हो चुका है। राजनीति में इससे ज्यादा अप्रत्याशित स्थिति क्या हो सकती है कि कुछ ही हफ्ते पहले इस गठबंधन के तेलंगाना में सत्ताधारी केसीआर की भारत राष्ट्र समिति के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की चर्चाएं जोड़ पकड़ रही थी।

पीवीएम के नेता इंडिया की बैठक में भी पहुंच सकते हैं
माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन की ओर से जो कुछ और दलों के उनके खेमे में आने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, उनमें पीवीएम के भी होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के नेता जयंत प्रभाकर पाटिल इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हो सकते हैं। उनके अलावा स्वाभिमान पक्ष के पूर्व सांसद राजू शेट्टी भी इस गठबंधन के प्रमुख नेता हैं। इनके अलावा इस गठबंधन में लाल निशान पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (एस),एसपी, लेफ्ट और बीआरएसपी जैसे दल भी शामिल हैं।

राजू शेट्टी पहले कह रहे थे तीसरा मोर्चा बनाने की बात
दिलचस्प बात है कि इसी महीने की शुरुआत में राजू शेट्टी कह रहे थे कि उनका मोर्चा बीजेपी और कांग्रेस का विकल्प देना चाहता है। महाराष्ट्र में तीसरे मोर्चे के लिए वे बीआरएस से भी बातचीत की कोशिश में थे। उन्होंने कहा भी था, 'दोनों दलों (बीजेपी-कांग्रेस) के साथ हमारा अनुभव खराब रहा है....जल्दी ही कोल्हापुर में सीपीएम-सीपीआई, समाजवादी पार्टी और बहुजन विकास अघाड़ी जैसे छोटे दलों के साथ चर्चा करने वाले हैं।'

वैसे तथ्य ये भी है कि पीवीएम के कई घटक दल पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के इंडिया गठबंधन में शामिल हैं। इसलिए इसका उसके प्रति झुकाव राजनीतिक तौर पर बहुत आश्चर्यजनक भी नहीं है। दरअसल, महाराष्ट्र में पिछले एक साल में शिवसेना और एनसीपी दोनों टूटी है। इसलिए, एमवीए के नेता लगातार इस खाई की भरपाई के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं।

बीजेपी का यहां बिगड़ सकता है चुनावी गणित
जहां तक प्रगतिक विकास मंच (पीवीएम) के चुनावी प्रभाव की बात है तो यह कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर और रायगढ़ जिलों के कुछ क्षेत्रों में असरदार हैं या कम से कम दूसरे गठबंधन की हार-जीत पर प्रभाव जरूर डाल सकते हैं। बदले चुनावी समीकरणों में इस इलाके में एनडीए और एमवीए दोनों के बीच लड़ाई तगड़ी होने की संभावना है।

ऐसे में 13 छोटी पार्टियों का झुकाव विपक्षी खेमे की ओर हुआ तो भारतीय जनता पार्टी को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है। क्योंकि, लोकसभा की 40 सीटों वाले बिहार में नीतीश कुमार के जेडीयू से उसे पहले ही बहुत तगड़ा झटका लग चुका है, जिसके साथ वह गठबंधन में 39 सीट जीती थी। इसलिए, महाराष्ट्र की 48 में से अधिकर सीटें जीतने का लक्ष्य बना रखा है, ताकि 2024 में तीसरी बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बन सके।

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