Baba Siddique Case: बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी का कराया गया Ossification टेस्ट, क्या होता है जांच में?
Baba Siddique Case Row: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार, 12 अक्टूबर को मुंबई के बांद्रा इलाके में तीन लोगों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय नीलमनगर के बाहर हुई। इस मामले में पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि तीसरा अभी भी फरार है।
हमलावरों की पहचान, हरियाणा के गुरमेल बलजीत सिंह (23 साल), उत्तर प्रदेश के धर्मराज कश्यप (19 साल) और उत्तर प्रदेश के शिव कुमार के रूप में की गई है। आरोपियों को रविवार, 13 अक्टूबर को अदालत के सामने पेश किया गया। कोर्ट में धर्मराज कश्यप ने यह दावा किया कि वो नाबालिग है। हालांकि, आरोपी के पास से बरामद आधार कार्ड में उसकी उम्र 19 साल लिखी हुई है।
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NCP नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में आरोपियों में एक धर्मराज कश्यप को मुंबई की एक अदालत ने अस्थ परीक्षण (Ossification Test) के लिए भेजा है ताकि यह पता लगाया जा सके की वह नाबालिग है या नहीं। बचाव पक्ष के वकील के अनुसार, धर्मराज कश्यप नाबालिग था, लेकिन सोमवार को हुए परीक्षण ने इस दावे को गलत साबित कर दिया। कश्यप को मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट ने 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। कश्यप ने दावा किया था कि वह 17 साल का है, जबकि उनके आधार कार्ड पर उनकी उम्र 19 साल थी।
ऑसिफिकेशन क्या है? (What is Ossification?)
ऑसिफिकेशन (Ossification) वह प्रक्रिया है जिसमें हड्डियों का निर्माण होता है, जो इंसानों में शैशवावस्था से लेकर किशोरावस्था के अंत तक होती है। ऑसिफिकेशन टेस्ट (Ossification Test) एक चिकित्सा प्रक्रिया है जो हड्डियों का विश्लेषण करती है ताकि उम्र का निर्धारण किया जा सके।
इस परीक्षण में शरीर की कुछ हड्डियों जैसे कि कॉलर बोन (Clavicle), स्तन हड्डी (Sternum), और श्रोणि (Pelvis) का एक्स-रे लिया जाता है ताकि इंसान की हड्डियों में वृद्धि की डिग्री का पता लगाया जा सके। इन हड्डियों को इसलिए चुना जाता है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ ये सबसे अधिक नाटकीय परिवर्तन से गुजरती हैं।
क्योंकि कुछ हड्डियां मानव के विकास के चरण के अनुसार एक निश्चित उम्र में सख्त हो जाती हैं और एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, इसलिए हड्डियां उम्र का निर्धारण करने का एक तरीका हो सकती हैं। हालांकि अदालतें अक्सर बाबा सिद्दीकी केस जैसे मामलों में इस विधि का उपयोग करती हैं, ये परीक्षण सबसे सटीक नहीं माने जाते।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, "अदालतों ने हमेशा माना है कि रेडियोलॉजिकल परीक्षा द्वारा प्राप्त साक्ष्य निस्संदेह व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक कारक है, लेकिन यह साक्ष्य निर्णायक और अचूक प्रकृति का नहीं होता।"
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