Ajit Pawar Death: अजित पवार की मौत के आखिरी 60 सेकंड का सच, मिल गया है सबूत, कब और कैसे होगा खुलासा?
Ajit Pawar Plane Crash Updates: क्या पायलट ने खतरे को भांप लिया था? क्या विमान के गिरने से पहले कॉकपिट में कोई अनहोनी हुई थी? बारामती के उस खेत में जब महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान आग के गोले में तब्दील हुआ, तो उसने अपने साथ कई सवाल दफन कर दिए। इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा है।
दरअसल, ब्लैक बॉक्स की मदद से इस हादसे से जुड़े सवालों से पर्दा हट सकता है, और हादसे की असली वजह सामने आ सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, विमान के गिरने से ठीक 60 सेकंड पहले का डेटा सबसे महत्वपूर्ण है। इस 'ब्लैक बॉक्स' में मौजूद कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) से यह खुलासा होगा कि क्या पायलटों ने कोई 'मे-डे' (Mayday) कॉल किया था या विमान में अचानक कोई धमाका हुआ था।

DGCA और जांच एजेंसियां अब मलबे से ब्लैक बॉक्स को बरामद करने और उसे लैब में भेजने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इसके साथ ही मलबे और विमान के पंखों (Flaps) की स्थिति का भी बारीकी से अध्ययन किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि लैंडिंग के वक्त विमान का बैलेंस कैसे बिगड़ा।
हादसे के बाद अब सारा ध्यान उस विमान पर है जिसमें अजित पवार सवार थे। यह VSR Ventures का Learjet 45 विमान था। चौंकाने वाली बात यह है कि यही विमान सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर भी भारी बारिश के दौरान क्रैश-लैंडिंग का शिकार हो चुका था।
ब्लैक बॉक्स क्या होता है और इसका रंग कैसा होता है?
विमान के भीतर दो रिकॉर्डिंग डिवाइस होते हैं जिन्हें 'ब्लैक बॉक्स' कहा जाता है। हालांकि इसका नाम ब्लैक है, लेकिन इसका असली रंग चमकीला नारंगी (International Orange) होता है ताकि मलबे में इसे आसानी से पहचाना जा सके।
विमान के आखिरी 60 सेकंड का पता कैसे चलता है?
ब्लैक बॉक्स के भीतर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) विमान की ऊंचाई, रफ्तार और इंजन की स्थिति जैसे 80+ डेटा पॉइंट्स को हर सेकंड रिकॉर्ड करता है। वहीं, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) पायलटों की बातचीत और अलार्म की आवाजें रिकॉर्ड करता है। इन दोनों को सिंक करके हादसे के आखिरी पलों का वर्चुअल री-क्रिएशन किया जाता है।
क्या भीषण आग में भी ब्लैक बॉक्स सुरक्षित रहता है?
हां, इसे स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम की कई परतों से बनाया जाता है। यह 1100°C की भीषण आग को एक घंटे तक और पानी के भारी दबाव को झेलने में सक्षम है, इसलिए इसके डेटा के सुरक्षित रहने की संभावना 99% होती है।
हादसे की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है?
भारत में विमान दुर्घटनाओं की जांच AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) और DGCA करती है। मलबे के वितरण, फोटोग्राफी और डेटा डिकोडिंग का काम इन्हीं एक्सपर्ट की देखरेख में होता है।
हादसे के कितने दिन बाद असल वजह का खुलासा होता है?
- प्रारंभिक रिपोर्ट (Preliminary Report): अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, हादसे के 30 दिनों के भीतर पहली रिपोर्ट देनी अनिवार्य होती है।
- डेटा डिकोडिंग (2-4 हफ्ते): अगर ब्लैक बॉक्स सुरक्षित है, तो 2 से 4 हफ्तों में कॉकपिट की बातचीत और तकनीकी खराबी के शुरुआती संकेत मिल जाते हैं।
- अंतिम रिपोर्ट (Final Report): हादसे की असली वजह और पूरी जानकारी वाली अंतिम रिपोर्ट आने में अक्सर 10 महीने से 1 साल तक का समय लग जाता है।












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