Aditya Thackeray: आदित्य ठाकरे फिर बने वर्ली के विधायक, मनसे ने बिगाड़ा सियासी खेल तो इस बार घटा वोट प्रतिशत
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। मुम्बई की वर्ली विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम पर हर किसी की नजर थी। यहां से उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का मुकाबला शिंदे गुट की शिवसेना से मिलिंद देवड़ा और राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस से संदीप देशपांडे हुआ। इस बार आदित्य ठाकरे को 63324 वोट मिले। 8801 वोटों से लगातार दूसरी बार वर्ली के विधायक बने। शिवसेना (शिंदे) के मिलिंद देवड़ा को 54523 मिले।
वर्ली सीट से आदित्य ठाकरे भले ही जीत गए, मगर पिछले चुनाव की तुलना में उनका वोट प्रतिशत घट गया।महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में आदित्य ठाकरे को कुल 89,248 वोट मिले थे। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सुरेश माने को 67,427 वोटों से हराया था। माने को 21,821 वोट मिले थे और वे दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं वंचित बहुजन अघाड़ी के गौतम अन्ना गायकवाड़ को 6,572 वोट मिले थे।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान आदित्य ठाकरे ने कई सीटों पर चुनाव प्रचार किया था और चुनाव के दौरान कि इस महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार आएगी। उनकी सरकार बनने के बाद वे गद्दारों को बर्फ की सिल्ली पर सुलाएंगे। गद्दारों से आदित्य ठाकरे का मतलब उन नेताओं से था, जो शिवसेना यूबीटी छोड़कर चले गए थे।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में आदित्य ठाकरे के वोटों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई और वे 63,324 वोटों पर आ गए। इस कमी के बावजूद वे 8,801 वोटों के मामूली अंतर से जीतने में सफल रहे। पिछले चुनाव में उनकी जीत का अंतर 67,427 था, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी मिलिंद देवड़ा को 54,523 वोट मिले।
आदित्य के वोटों पर मनसे का प्रभाव
इस चुनाव में मनसे के संदीप देशपांडे को 19,367 से ज़्यादा वोट मिले। इससे पता चलता है कि आदित्य ठाकरे के कुछ पुराने समर्थकों ने मनसे का दामन थाम लिया है। पिछले चुनाव में मनसे ने आदित्य के खिलाफ़ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
वंचित बहुजन आघाड़ी को इस बार सिर्फ 2,885 वोट मिले। इसके अलावा, बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ 730 वोट मिले। नतीजतन, राज ठाकरे की पार्टी मनसे इस निर्वाचन क्षेत्र में तीसरे सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी।
आदित्य ठाकरे को पिछले प्रदर्शन की तुलना में 25,924 वोटों की कमी का सामना करना पड़ा। इस बदलाव से सवाल उठता है कि क्या मनसे ने उनके समर्थन आधार को हटाने में कोई भूमिका निभाई है।
संक्षेप में, वर्ली सीट पर दोबारा जीत के बावजूद, आदित्य ठाकरे को इस बार कम मतदाता समर्थन और एमएनएस जैसी अन्य पार्टियों से बढ़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ा।












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