लेहड़ा देवी मंदिर: महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने की थी मां की आराधना
फरेंदा में स्थित मां लेहड़ा देवी का मंदिर जंगल में बना हुआ है।यहा के बारे में यह मान्यता है कि कई हजार साल पहले यहां पर एक नदी बहती थी, जहां एक दिन माता एक किशोरी का रूप रखकर गईं और नाविक से नदी पार कराने को कहा। मां की स
महराजगंज,30सितंबर: शारदीय नवरात्र के अवसर पर दु्र्गा मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लग रही है।सभी अपनीेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे मुराद लेकर मां के दरबार में उपस्थित हो रहे हैं।महराजगंज जिले के फरेन्दा तहसील में एक ऐसा ही प्राचीन मंदिर है जो भक्तों की आस्था प्रमुख केंद्र बना हुआ है।यहां प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या लोग आते हैं।फरेंदा नेपाल सीमा से नजदीक है।ऐसे में नेपाल से भी मां के भक्त यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।यह मंदिर हजारों साल पुराना है।महाभारत काल में पाण्डवों ने वनवास के दौरान यहां निवास किया था।

यह है मान्यता
फरेंदा में स्थित मां लेहड़ा देवी का मंदिर जंगल में बना हुआ है।यहा के बारे में यह मान्यता है कि कई हजार साल पहले यहां पर एक नदी बहती थी, जहां एक दिन माता एक किशोरी का रूप रखकर गईं और नाविक से नदी पार कराने को कहा। मां की सुंदरता पर आसक्त हो नाविक ने उनसे छेड़खानी करनी चाही तो उस पर कुपित होकर मां ने नाविक और नाव के साथ उसी पल जल समाधि ले ली।

पांडवों ने की थी मां की आराधना
ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में यहीं पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने मां की आराधना की थी। द्रौपदी के आंचल फैलाकर आशीर्वाद मांगने पर मां ने पांडवों को विजय श्री का आशीर्वाद दिया था।इस मंदिर में एक प्रथा है कि जो भी अपने आंचल में हिजड़ों से नृत्य करवाता है। उसकी हर मुराद पूरी होती है। जिसके चलते यहां पर हर समय नृत्य का आयोजन होता रहता है।

श्रद्धालुओं की रहती है भारी भीड़
वैसे तो साल भर लेहड़ा माता मंदिर पर भक्तों की भीड़ रहती है।लेकिन चैत्र व शारदीय नवरात्र पर यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण यहां नवरात्र पर्व में भारी संख्या में नेपाल के भी श्रद्धालु मां का दर्शन करने आते है। ऐसी मान्यता है कि अपने दुखों को लेकर मां के दरबार मे आते है और यहां से मुरादे पूरी कर लौटते हैं।












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