डेढ़ दिन में कैसे टूटा शिवराज का उपवास, इस रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान उपवास पर बैठने वाले राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सवाल उठ गए हैं।

समाचार चैनल ABP न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार भोपाल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित किए गए उपवास के मंच पर जो किसान उनके साथ बैठे थे वो कुछ लोगों के कहने पर उनका उपवास तुड़वाने आए थे।

तब शिवराज ने किया था ऐलान

तब शिवराज ने किया था ऐलान

बता दें कि 6 जून को मंदसौर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स की फायरिंग में 5 किसानों के मारे जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान शांति के लिए उपवास पर बैठ गए थे। बता दें कि 9 तारीख की शाम शिवराज ने उपवास का ऐलान किया था।

मंदसौर से भोपाल पहुंच गए किसान!

मंदसौर से भोपाल पहुंच गए किसान!

समाचार चैनल के अनुसार 10 तारीख को ही भोपाल से 350 किलोमीटर दूर मंदसौर के 4 मृतक किसानों के परिजन उनके मंच पर पहुंच गए। समाचार चैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आखिर ऐसा कैसे हुआ कि जिन किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई, उनके परिजन कुछ ही घंटे के भीतर शिवराज का उपवास खत्म कराने के लिए मंदसौर से भोपाल पहुंच गए थे।

बबलू के रिश्तेदार ने कहा...

बबलू के रिश्तेदार ने कहा...

समाचार चैनल के अनुसार जब वो मृतकों के परिजनों से बात करने गिए तो उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि लोगों को ले जाया गया था।

मृतक पूनम चंद पाटीदार, बबलू के रिश्तेदार अर्जुन ने कहा 'उन्होंने ऐसा प्रदर्शितकिया कि ये परिवार के लोग आए हैं हमारा उपवास तुड़वाने के लिए, बाकी ऐसा कुछ नहीं हुआ।

'हमसे मीडिया के सामने ऐसा बोलने को कहा गया'

'हमसे मीडिया के सामने ऐसा बोलने को कहा गया'

अर्जुन ने कहा कि 'यहां से जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा जी ने बोला कि आप ऐसा बोल दो कि सीएम साहब का उपवास तोड़वने आए हैं। हमसे मीडिया के सामने ऐसा बोलने को कहा गया। मैंने मना कर दिया। मैं क्यों बोलूं भाई?'

शिवराज के साथ मंच पर थे सत्यनारायण के पिता

शिवराज के साथ मंच पर थे सत्यनारायण के पिता

मृतक सत्यनारायण के पिता जो शिवराज के साथ मंच पर बैठे थे, उनके रिश्तेदार ने कहा कि 'राधेश्यामजी ने बताया था.. उनके पीए ने.. मतलब उन्होंने बोला कि तुम किसी बात पर चर्चा मत करना. पैसे या नौकरी की ऐसी कोई बात नहीं करना. सिर्फ ये कहना कि हम आपका उपवास तुड़वाने के लिए आए।'

कोई अपनी इच्छा से नहीं गया था

कोई अपनी इच्छा से नहीं गया था

वहीं मृतक अभिषेक के भाई संदीप को भोपाल ले जाने पर उनके पिता ने कहा कि ये गलत है। किसान किसी का गुलाम नहीं है। कोई अपनी इच्छा से नहीं गया था। वहीं सरकार की ओर से जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कि वो 10 जून को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अगवानी के लिए दतिया गए थे, इससे उनका कोई कनेक्शन नहीं है।

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