MP News: यूपी एसटीएफ ने पैरलल सॉफ्टवेयर से टोल फ्रॉड का किया खुलासा, मध्य प्रदेश के छह टोल प्लाजा की जांच शुरू
MP News: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुरुवार को देशभर में पैरलल सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोल वसूली में धोखाधड़ी का खुलासा किया। इस जांच में मध्य प्रदेश के छह टोल प्लाजा भी शामिल हैं, जिनकी जांच एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की टीम ने शुरू कर दी है।
इन टोल प्लाजा पर पैरलल सॉफ्टवेयर का उपयोग करके वसूली की जा रही थी, जिससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही थी।

जांच के तहत टोल प्लाजा
मध्यप्रदेश के जिन छह टोल प्लाजा की जांच हो रही है, उनमें से दो वंशिका कंस्ट्रक्शन के पास हैं, जो कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय शर्मा की बेटी के नाम पर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, गढ़ा टोल का कॉन्ट्रैक्ट बंसल पाथवे, जंगवानी का कोरल, और मोहतरा टोल का ठेका यूपी की एके कंस्ट्रक्शन के पास है।
जांच में सामने आई कुछ बातें
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि मोहतरा, सालिवाड़ा, चिखलीकला, और जंगवानी टोल प्लाजा पर जांच की गई, लेकिन शुरुआती जांच में सॉफ्टवेयर के जरिए पैरलल वसूली के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, सालिवाड़ा टोल पर यह बात सामने आई कि राजनीतिक रसूख वाले लोगों से टोल नहीं लिया जा रहा था। इस पर कंपनी के मैनेजर को चेतावनी दी गई और स्पष्टीकरण मांगा गया।
आगे की जांच
इस पूरे मामले में एनएचएआई और एसटीएफ की टीम ने जांच के दायरे को और भी व्यापक कर दिया है। टोल प्लाजा पर पैरलल सॉफ्टवेयर के माध्यम से किए गए फ्रॉड के मामलों की जांच में अब और तेजी लाई जाएगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी राजस्व की हानि न हो और टोल वसूली सही तरीके से की जाए।
इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि कई टोल प्लाजा पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की घटनाएं हो रही थीं, जिससे न सिर्फ सरकार बल्कि यात्रियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन मामलों पर कड़ा कदम उठाता है और सख्त जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या नहीं।
संजय शर्मा ने टोल फ्रॉड मामले में दी प्रतिक्रिया, कहा- जांच के लिए तैयार हूं
उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा पैरलल सॉफ्टवेयर से टोल वसूली में धोखाधड़ी के खुलासे के बाद, वंशिका कंस्ट्रक्शन के मालिक और पूर्व विधायक संजय शर्मा ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर दो टोल संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनका कहना था कि ये टोल कुछ महीने पहले ही उनकी फर्म के पास आए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन टोल प्लाजा पर इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर उनका नहीं, बल्कि एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) का होता है।
संजय शर्मा का बयान
संजय शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "अगर टोल वसूली में कोई गड़बड़ी या चोरी की बात सामने आई है, तो उसकी जांच जरूर होनी चाहिए। लेकिन सॉफ्टवेयर हमारा नहीं होता, यह तो एनएचएआई का ही होता है। एनएचएआई वाले ही बता पाएंगे कि सच्चाई क्या है।" उन्होंने आगे कहा कि जांच के लिए वह पूरी तरह से तैयार हैं और अगर किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
संजय शर्मा ने इस मामले में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सही तरीके से काम किया है और अगर इस मामले में कोई गलती या धोखाधड़ी हुई है, तो इसकी जांच के लिए वह पूरी तरह से सहयोग करेंगे।
एनएचएआई की भूमिका पर जोर
पूर्व विधायक ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि एनएचएआई के द्वारा निर्धारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है और यह पूरी प्रक्रिया उनके नियंत्रण में होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनएचएआई इस मामले में पूरी पारदर्शिता से जांच करेगा और अगर किसी भी स्तर पर कोई धोखाधड़ी पाई जाती है, तो उसे सामने लाया जाएगा।












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