रामराजा की नगरी ओरछा में नहीं बिकेगी शराब, उमा की शराबबंदी का असर, दुकान बंद
श्रीरामराजा सरकार की नगरी ओरछा अब पूर्ण पवित्र नगर होगा। 1 अप्रैल से यहां पूर्ण शराबबंदी रहेगी। उमा भारती के विरोध के बाद यहां की दुकान का अब नया टेंडर नहीं होगा।

उमा भारती ने ओरछा की शराब दुकान को लेकर विरोध जताया। गोबर फेंका और करीब दो महीनों पहले उन्होंने यहां मधुशाला में गोशाला अभियान शुरू कर विरोध जताया था। उमा की शराबबंदी मुहिम का असर अब यह हुआ कि सरकार ने ओरछा की इस शराब दुकान को बंद करने का निर्णय लिया है। रामराजा सरकार की इस नगरी में अब शराब नहीं बिकेगी। बता दें कि प्रशासन ने टीकमगढ़-निवाड़ी जिले की 86 शराब दुकानों के टेंडर किए हैं। इनके टेंडर ओपन होकर ठेकेदार भी तय हो गए हैं। यह एक अप्रैल से लागू हो जाएगा।
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आबकारी विभाग से मिली जानकारी अनुसार टीकमगढ़ जिले की 54 और निवाड़ी जिले में 32 शराब दुकानें हैं। इन शराब दुकानों को संचालित करने के लिए मार्च में प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो पूरी हो चुकी है। बता दें कि निवाड़ी में 33 शराब दुकानें हैं, लेकिन इनमें से महज 32 दुकानों के टेंडर किए गए हैं। 33 वीं शराब दुकान ओरछा का टेंडर नहीं किया गया है।
उमा भारती ने अपने गांव से डूडा से की थी शराबंदी अभियान की शुरूआत
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने निवाड़ी जिले में अपने पुश्तैनी गांव डूडा से शराबबंदी की शुरूआत की थी। उन्होंने इसके बाद पूरे प्रदेश में नशामुक्ति और शराब को प्रतिबंधित करने का अभियान चलाया था। वे भोपाल में शराब दुकान में पत्थर तो ओरछा की शराब दुकान पर गोबर फेंकती नजर आ रहीं थीं। ओरछा की शराब दुकान के बाहर उन्होंने कई दफा प्रदर्शन किए। पहली दफा गोबर फेंककर तो दूसरी दफा धरना देकर तो तीसरी दफा यहां मधुशाला में गोशाला अभियान की शुरूआत की थी। सुबह-सुबह से यहां गायांे को बांधकर उन्हें चारा, केले आदि खिलाए थे।












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