90 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, फिर भी बचा नहीं पाए बोरवेल में गिरे प्रह्लाद की जान
टीकमगढ़। खबर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से है। यहां 04 नवंबर को बोरवेल में गिरा तीन साल का प्रह्लाद आखिर जिंदगी की जंग हार गया। एनडीआरएफ की टीम ने शनिवार (07 नवंबर) की देर रात करीब तीन बेज रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया और तीन साल के प्रह्लाद को बाहर निकाल लिया। हालांकि, उसे बचाया नहीं जा सका। टीकमगढ़ के जिलाधिकारी आशीष भार्गव ने बताया कि बीते दो दिनों से बच्चा बोरवेल में कोई हलचल नहीं कर रहा था। फिलहाल प्रह्लाद के शव को पोस्टमॉर्ट के लिए भेज दिया है, जहां उसका पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है।
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टीकमगढ़ जिले के सैतपुरा गांव में बुधवार को हरदयाल कुशवाहा का तीन साल का बेटा प्रह्लाद खेलते-खेलते बोरवेल के पास चला गया और अचानक से उसमें गिर गया। बच्चे के बोर में गिरते ही परिजनों की चीख पुकार मच गई। हालांकि, स्थानीय स्तर पर उसे निकालने का प्रयास किया था, मगर उसे बाहर निकाला नहीं जा सका। आर्मी, NDRF, पुलिस और प्रशासन की टीम ने लगातार 90 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शनिवार देर रात करीब 11 बजे एनडीआरएफ की टीम ने खुदाई रोक दी थी। इसके बाद देर रात झांसी से एक्सपर्ट की टीम आई, जिन्होंने मैग्नेटिक अलाइनमेंट के जरिए सुरंग की दिशा तय की। इसके बाद दोबारा खुदाई शुरू की गई और रात तीन बजे बच्चे को निकाला गया।
प्रह्लाद के लिए पूरे प्रदेश में दुआएं की जा रही थीं। रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की कोई परेशानी न आए इसलिए भीड़ को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लगा लगाई थी। मासूम को बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन की कमी न हो, इसलिए बाहर से ऑक्सीजन दी गई। लेकिन बोरवेल में किसी भी प्रकार की हलचल भी टीम को नहीं दिख रही थी। इससे पहले बीना रिफाइनरी से टनल खुदाई की मशीन भी मंगवाई गई थी। लेकिन मामूली सी चूक होने से बच्चे तक पहुंचने की कोशिश शनिवार देर रात तक नाकाम हो गई।
डीएम आशीष भार्गव के मुताबिक, तीन बाय तीन की टनल बनाई गई थी। चूंकि बोर का डायामीटर तिरछा था। इस कारण टनल बनाने में परेशानी आ रही थी। इसके अलावा यहां पानी का फ्लो भी ज्यादा था। हाथ से भी खुदाई करनी पड़ी।












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