'डूबते को तिनके का सहारा'-बोरबेल में गिरने पर अटक गया था दीपेंद्र, जानें पत्थर ने कैसे बचाई जान
सागर, 30 जून। कहते हैं श्रृद्धा से पूजें तो पत्थर भी भगवान बन जाते हैं... बीते रोज छतरपुर में बोरवेल में गिरे 5 वर्षीय दीपेंद्र के लिए एक पत्थर ही देवदूत बन गया था। पत्थर बोरवेल में करीब 20 फीट पर जाकर अटक गया और उसके ऊपर दीपेंद्र खडा रहा, बोरवेल 100 फीट से अधिक गहरा था। कम गहराई पर होने के कारण दीपेंद्र को जल्द बाहर निकाला जा सका।

छतरपुर के नारायणपुर में अखिलेश यादव के खेत में बोरवेल के खुले पडे मुहाने पर एक पत्थर रखकर उसे ढांका गया था। दीपेंद्र जब खेलते-खेलते बोरवेल के पास पहुंचा तो वह उसी पत्थर पर खडा हो गया था, पत्थर अचानक धंसकर बोरवेल में नीचे गिर गया साथ ही उस पर खडा दीपेंद्र भी बोरवेल में गिर गया था। बोरवेल की गहराई काफी ज्यादा थी, जबकि पत्थर करीब 20 से 25 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया था। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने रेस्क्यु के लिए जेसीबी से गड्ढा खोद लिया था, लेकिन उसके पहले ही जबलपुर से पहुंची टीमों ने उसे रस्सी के सहारे बाहर निकाल लिया था।
साढे सात घंटे बोरवेल में फंसा रहा दीपेंद्र
नारायणपुर के अखिलेश यादव का पांच साल का बेटा बुधवार को खेत के बोरवेल में दोपहर करीब ढाई बजे गिर गया था। उसे रात करीब 10 बजे आसपास बाहर निकाला जा सका था। वह करीब साढे 7 घंटे बोरवेल के अंदर फंसा रहा था।
बहुत एक्टिव और निर्भीक है
बोरवेल में गिरने वाला दीपेंद्र मासूमियत की उम्र में भी महज पांच साल में काफी एक्टिव और निर्भीक है। बोरवेल में गिरने के बाद भी वह ज्यादा डरा नहीं था। करीब आधे एक घंटे बाद जब उसके पिता तलाशते आवाज लगाते बोरवेल के पास पहुंचे थे तो उसने बोरिंग के अंदर से ही आवाज लगाकर बताया था कि वह बोरिंग में गिर गया है। वह लगातार बात करता रहा था। रात में जब रेस्क्यु टीम के सदस्यों ने उसके पास दो रस्सी भेजी और उसे कमर और कंधे में बांधने के लिए बोला तो उसने वैसे ही कमर और कंधे में रस्सियां बांध ली थी, जिसके सहारे उसे ऊपर निकाल लिया था।












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