MP: कौन हैं सड़क पर सब्जी बेचने वाली “सीता”, जो विधायक की बहन को हराकर पार्षद बनी हैं, पढ़िए खबर
सागर, 23 जुलाई। टीकमगढ़ में विधायक की बहन को करारी शिकस्त देकर चर्चाओं में आई सीतादेवी कुशवाहा बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सीता खेत के एक हिस्से में सब्जियां उगाकर खुद ही डलिया में रखकर उन्हें बेचती हैं। कांग्रेस ने कद्दावर विधायक के परिजन के खिलाफ उनपर भरोसा जताया और सीतादेवी ने जीत का परचम भी लहराया। जिस वार्ड नंबर-1 से सीतादेवी चुनाव लड रही थीं, वह वार्ड मतदान के दिन विवादों के कारण खासा चर्चा में रहा है।

टीकमगढ़ नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 1 से कांग्रेस पार्टी ने सीतादेवी कुशवाहा को टिकट देकर मैदान में उतारा था। नाम फाइनल होने तक सीतादेवी को खुद पता नहीं था कि वे पार्षद बनने जा रही हैं। ठेट देहाती परिवेश में खेतों में सब्जी-भाजी और खेती का काम करने वाली सीता डलिया में सब्जी रखकर बेचने जाती थीं। अब वे अपने वार्ड से पार्षद बन गई हैं।
भाजपा प्रत्याशी से सीधे टक्कर थी।

टीकमगढ में सीतादेवी कुशवाहा ने नई इबारत लिख दी है। वे किसान हैं और अपने खेत पर सब्जियां उगाकर खुद बाजार में बेचने जाती हैं। चुनाव में उनकी भाजपा प्रत्याशी नेहा गिरी से सीधी टक्कर थी, क्योंकि वार्ड में केवल 2 प्रत्याशी ही आमने-सामने की थे। नेहा गिरी भाजपा के टीकमगढ विधायक राकेश गिरी की बहन है। इस वार्ड पर सबकी नजरे टिकीं थी। चुनाव के दौरान उन्हें चुनाव से हट जाने के लिए धमकियां और प्रलोभन भी दिए गए, घर छोडकर चुनाव तक बाहर चले जाने को लेकर कहा गया, लेकिन सीता ने हिम्मत नहीं हारी और मैदान में डटी रहीं। सीतादेवी को 49 वोट से जीत हासिल हुई है।
पूर्व मंत्री व विधायक के बीच झगड़ा तक हो गया था
सीता देवी को लगातार धमकियों के बाद उन्होंने वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल किया था। लेकिन पुलिस व प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया था। सीतादेवी का आरोप है कि मतदान के दिन उन्हें विधायक के परिजन ने पोलिंग से बाहर भगा दिया था। जिसके बाद पूर्व मंत्री व विधायक और उनके परिजन व समर्थकों में खूब झगडा हुआ था। आखिरकार वोटों की गिनती के बाद कांग्रेस प्रत्याशी सीता कुशवाहा 49 वोटों से चुनाव जीत गई। उन्हें 718 और भाजपा प्रत्याशी को 669 वोट मिले।
उमा भारती भी इस मामले में सामने आई थीं
मतगणना के दिन विधायक राकेश गिरी और कांग्रेस के पूर्व मंत्री के बीच मतदान स्थल जमकर विवाद हुआ था, समर्थकों और परिजन के बीच मारपीट तक हो गई थी। मामले में कांग्रेस के पूर्व मंत्री के परिवार जन पर प्रकरण भी दर्ज कराया गया था। देर शाम उमा भारती भाजपा विधायक के घर पहुंची थी और राकेश गिरी से चर्चा के बाद बाहर आकर बयान दिया था कि विधायक के भाई की हत्या की साजिश की गई थी, वे बच गए। मामले में जान से मारने के प्रयास की धाराएं भी बढाई गई थीं।
वार्ड में पानी और नाली की समस्या













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