Bhopal: शिवाजी महाराज की जयंती मनाने को लेकर हुआ विवाद, BJP के कृष्णा घाडगे और पप्पू विलास ने किया चक्का जाम
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाने को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। दरअसल, भोपाल के शिवाजी महाराज चौराहा पर हर साल की तरह इस बार भी शिवाजी महाराज के जन्मोत्सव के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था, लेकिन प्रशासन के आदेश पर इस बार कार्यक्रम में कुछ अड़चनें आईं।
तहसीलदार कुणाल द्वारा कार्यक्रम में लगे साउंड सिस्टम और टेंट को हटाने के आदेश के बाद यह विवाद गहरा गया।

तहसीलदार के आदेश के बाद बवाल
तहसीलदार द्वारा शिवाजी महाराज के जन्मोत्सव के कार्यक्रम के लिए लगाए गए साउंड सिस्टम और टेंट को हटाए जाने के आदेश के बाद कार्यक्रम आयोजकों में आक्रोश फैल गया। हर साल की तरह इस बार भी शिवाजी महाराज के सम्मान में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित होने वाला था, लेकिन प्रशासन के इस कदम से आयोजक नाराज हो गए।
चक्का जाम और प्रदर्शन
इस विवाद के विरोध में, बीजेपी कार्यकारिणी सदस्य कृष्णा घाडगे और मराठा समाज के लोगों ने शिवाजी महाराज चौराहा पर चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। कृष्णा घाडगे ने बताया कि यह कार्यक्रम मराठा समाज की भावना से जुड़ा हुआ है और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह अधिकार नहीं है कि वह इस तरह से मराठा समाज की भावनाओं से खेलें और एक ऐतिहासिक आयोजन को बाधित करें।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन नियमों के तहत किया जाता रहा है, फिर इस बार प्रशासन ने बिना किसी स्पष्ट कारण के कार्यक्रम में रुकावट डालने की कोशिश की। इससे समाज में नाराजगी बढ़ गई।
तहसीलदार ने किया माफी और धरना प्रदर्शन समाप्त
चक्का जाम और प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और तहसीलदार कुणाल स्वयं शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने पहुंचे। तहसीलदार ने अपनी गलती मानते हुए क्षमा प्रार्थना की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त किया। कृष्णा घाडगे और अन्य प्रदर्शनकारी नेताओं ने तहसीलदार के सामने अपनी नाराजगी जताई, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक कार्यवाही को सही ठहराया।
घटना के बाद का माहौल
कृष्णा घाडगे और मराठा समाज के नेताओं ने तहसीलदार से यह भी मांग की कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हो और प्रशासन को समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि मराठा समाज की पहचान हैं और उनके सम्मान में किए जाने वाले आयोजन को किसी भी हालत में रुकने नहीं दिया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार और प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की बात की कि आने वाले आयोजनों में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों और शिवाजी महाराज की जयंती की तरह के आयोजन प्रशासनिक अनुमति के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों।
शिवाजी महाराज की जयंती मनाने को लेकर हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भावनाएं कितनी गहरी होती हैं। मराठा समाज के लिए यह सिर्फ एक ऐतिहासिक दिन नहीं, बल्कि उनकी पहचान और सम्मान का प्रतीक है। इस विवाद ने प्रशासन को यह संदेश भी दिया कि किसी भी आयोजन के प्रति संवेदनशीलता और समग्र रूप से सभी समुदायों की भावनाओं का आदर करना कितना महत्वपूर्ण है।












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