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Serial killer: आठ साल पहले घर से भागा था शिवप्रसाद धुर्वे, जब भी आया पैसे मांगे, झगड़ा कर फिर भागा!

सागर, 3 सितम्बर। सीरियल किलर शिवप्रसाद धुर्वे महज 19 साल की उम्र में फेमस होने के लिए अपराध की काली दुनिया में उतर गया। उसने सागर, भोपाल और पुणे में 5 बेकसूरों की हत्याएं कर डाली। फिल्मी किरदार केजीएफ के राॅकी डाॅन के जैसे बनने की चाहत में वह शिवप्रसाद को दरिंदा बना दिया। केसली में केंकरी गांव में उसका परिवार बेहद गरीबी में गुजर करा है। वह अपने पिता से लड़कर 10 दिन पहले सागर भाग आया था। वह आठ साल पहले ही घर से बाहर चला गया था। शुरु से ही मनमर्जी चलाने का आदी रहा है। उसकी मां को तो गुमान तक नहीं है कि उसके बेटे ने क्या कर डाला है।

पुलिस ने शिवप्रसाद धुर्वे को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है।

पुलिस ने शिवप्रसाद धुर्वे को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है।

सागर पुलिस ने शिवप्रसाद धुर्वे को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस कस्टडी में भी उसका व्यवहार बिलकुल सामान्य है। वह कभी मुस्कराकर तो कभी हंसकर जवाब देते हैं। उसके द्वारा की गई निर्मम हत्याओं का उसे तनिक भी मलाल नहीं है। इधर मीडिया उसके पेतृक गांव केंकरी केसली पहुंची तो वहां पता चला किया वह महज 12-13 साल की उम्र से बाहर रहने चला गया था। साल में एकाध दफा घर आता था। जब भी घर आता अपने पिता नन्हेंवीर से लड़ता रहता था। वे थोड़ी बहुत खेती कर परिवार पालते हैं। वह उनसे जमीन बेचकर पैसे देने की बात करता था। वह कहता था किराने की दुकान खोलना है। जब पिता ने मना किया तो वह लड़कर घर से भाग गया। घर से भागकर जाना उसकी आदत में शामिल था।

भाई-बहन मिलाकर घर में कुल पांच सदस्य

भाई-बहन मिलाकर घर में कुल पांच सदस्य

शिवप्रसाद धुर्वे का परिवार एकदम सामान्य और गरीब परिस्थिति का है। खप्पर की छोपड़ीनुमा घर में आज भी उसका परिवार रह रहा है। घर में बैठने के लिए केवल खाट है। उसका बड़ा भाई गुजरात में कहीं नौकरी करता है तो बहन की शादी हो चुकी है। वह घर में सबसे छोटा था, लेकिन शुरु से ही वह मनमर्जी चलाने का आदी रहा है। उसके मन का काम न हो तो वह घर में सभी से लड़ाई झगड़ा करने पर उतारु हो जाता है।

मां सदमें में है, उसे समझ नहीं आ रहा क्या हो गया

मां सदमें में है, उसे समझ नहीं आ रहा क्या हो गया

शिवप्रसाद धुर्वे की मां सीतारानी बहुत ही सीधी-साधी महिला हैं। ठेट देहात में रहने वाली गृहणी हैं। जब कभी खेत में पति नन्हेंवीर के साथ हाथबंटा लेती हैं। जब उनसे बेटे के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि वह तो सालों से बाहर रहता है। साल दो साल में एकाधबार घर आता है। वह साइकल ही चलाता है। कुछ दिन पहले पैसे न मिलने से वह पिता से लड़कर फिर से साइकल उठाकर चला गया था। उन्हें नहीं पता कि वह कहां है और उसने क्या किया है।

गांव में कभी उसका किसी से झगड़ा नहीं हुआ

गांव में कभी उसका किसी से झगड़ा नहीं हुआ

शिवप्रसाद को लेकर गांव के लोगों में खासा कौतुहल व उत्सुकता है। उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला कि सागर में सीरियल किलर बनकर हत्याएं करने वाला अपराधी उनके गांव का शिवप्रसाद धुर्वे है। गांव में उसकी किसी से ऐसी दोस्ती भी नहीं है। वह कम ही रहता रहा है, इस कारण लोगों को उससे ज्यादा मतलब भी नहीं है। लेकिन इतना बड़ा अपराधी उनके गांव से है और बेदर्दी से बेकसूर लोगों की हत्याएं कर देता है, ऐसा खुंखार अपराधी उनके बीच से निकला इसको सुनकर वे आश्चर्यचकित जरुर रहते हैं।

पिता की जमीन बिकवाना चाहता था शिवप्रसाद, 14 साल में घर छोड़ दिया था

पिता की जमीन बिकवाना चाहता था शिवप्रसाद, 14 साल में घर छोड़ दिया था


सीरियल किलर शिव प्रसाद धुर्वे के गांव में सन्नाटा पसरा हैं। उसके पिता नन्हें वीर अवाक हैं, मां सदमें में हैं। वह आठ दिन पहले अपने पिता से लड़कर आया था। कहता था खेती बेचकर पैसे दो किराने की दुकान खोलना है। वह आठ सालों से दूसरे शहरों में रह रहा था। लाकडाउन में वह गुजरात से साइकल से सागर आया था। गांव में कभी किसी से उसका झगड़ा नहीं हुआ। साल में एकाध बार ही घर आता था।

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