Sagar: विशेषज्ञों की राय, मंकीपाॅक्स से बचाव के लिए कोरोना जैसा प्रोटोकाॅल जरुरी
सागर, 18 अगस्त। मंकीपाॅक्स जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी को लेकर सागर के डाॅ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि आगे आकर जागरुकता कार्यक्रम चला रहा है, ताकि लोग मंकीपाॅक्स बीमारी से समय रहते बचाव कर सकें और स्वस्थ रह सकें। इसके लिए समय-समय पर वेबिनार का आयोजन कर विशेषज्ञ डाॅक्टर्स के माध्यम से परिचर्चा आयोजित की जा रही हैं।

डाॅ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता स्वयं वेबीनार में शामिल होकर मंकीपाॅक्स बीमारी को लेकर विशेषज्ञों से चर्चा कर रही हैं। बीते रोज बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज के एसोसिएट प्रोफेसर एवं कोविड केयर के प्रभारी नोडल अधिकारी डाॅ. मनीष जैन एवं कम्युनिटी मेडिसिन के डाॅ. भूपेंद्र रोहित ने मंकीपाॅक्स बीमारी को लेकर विस्तृत जानकारी देते हुए, इसकी उत्पत्ति, इसके प्रसार, मानव शरीर पर इसके दुष्प्रभाव, इंसानों के लिए कितना घातक है, इससे बचाव आदि पर जानकारी दी।

डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के मानव संसाधन विकास केंद्र ने महामारी मंकीपॉक्स से नागरिकों को जागरूक करने के लिए ऑनलाइन मोड में एक दिवसीय मंकीपॉक्स जागरूकता वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार में देश भर से 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ मनीष जैनए एसोसिएट प्रोफेसरए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेजए सागर और डॉण् भूपेंद्र रोहितए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेजए सागर के सहायक प्रोफेसर इस वेबिनार के लिए प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुलपति प्रोण् नीलिमा गुप्ता ने मंकीपॉक्स के गंभीर परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने एक प्राणी विज्ञानी होने के नातेए इसकी उत्पत्ति और विकास पर टिप्पणी की और इलाज से रोकथाम की आवश्यकता को रेखांकित किया।
मंकीपॉक्स का संक्रमण और मृत्यु दर covid की तुलना में कम है
डॉण् मनीष जैन कोविड केयरए सागर के नोडल अधिकारी ने मंकीपॉक्स के इतिहास और लक्षणों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने इसे एक वायरल बीमारी बताते हुए इसकी उत्पत्ति, संक्रमण के तरीके और जानवरों से इंसान और इंसान से इंसान में संचरण के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स एक स्व सीमित बीमारी है। मंकीपॉक्स के दृश्य और अदृश्य लक्षणों जैसे बुखारए कमजोरीए खांसी और शरीर पर चकत्ते के प्रति उन्होंने आगाह किया। उन्होंने कहा कि हालांकि मंकीपॉक्स का संक्रमण और मृत्यु दर covid की तुलना में कम है। बीमारी से बचाव के लिए उन्हीं उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की सलाह
डॉ भूपेंद्र रोहित, सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने इस बीमारी के खिलाफ निवारक और उपचारात्मक उपायों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने शारीरिक संपर्क, मौखिक और नाक की बूंदों और खुले त्वचा के घावों और यौन संबंधों जैसे संचरण के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष माध्यमों जिनसे बीमारी फैल सकती है जानकारी दी। उन्होंने एहतियात के तौर पर कोविड की तरह सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की सलाह दी। डॉ रोहित ने मंकीपॉक्स के रोगियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले के उपायों, शारीरिक संपर्क, अलगाव, सहायक प्रबंधन और दवाओं के बारे में बताया। डॉ अभिषेक कुमार जैन, विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने सत्र का संचालन किया। सत्र के बाद प्रतिभागियों के साथ बातचीत हुई। डॉ आरटी बेद्रे, निदेशक यूजीसी-एचआरडीसी विश्वविद्यालय भी वेबीनार में शामिल हुए थे।












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