PM Modi के गुजरात से लेकर ममता दीदी के बंगाल तक गरीबों का पेट भर रहा मप्र पौष्टिक गेहूं
Prime Minister Narendra Modi के गुजरात से लेकर ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल सहित उड़ीसा, झारखंड जैसे राज्यों को मप्र का पौष्टिक गेहूं भा रहा है। हजारों टन गेहूं बीना मालगोदाम सहित अन्य रेलवे गोदामों से लोड कराकर एफसीआई इन राज्यों को गेहूं भेज रहा है। मिली जानकारी अनुसार करीब 16 लाख 38 हजार क्विंटल गेंहू अन्य राज्यों को भेजा जाना है।

MP के गेहूं की देश के कई राज्यों में तगड़ी मांग है। देश में गुजरात, पश्चिमबंगला, उड़ीसा और झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले अनाज में मप्र का गेहूं वहां गरीबों का पेट भरेगा। इसकी शुरूआत भी हो चुकी है। एफसीआई, फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अकेले बीना मालगोदाम से बीते दिनों 6 रैक से 1 लाख 63 हजार 800 क्विंटल गेहूं देश के पांच राज्यों को भेज दिया है। जिसमें गुजरात के डीसा, पश्चिम बंगाल के खड़गपुर, महाराष्ट्र के उसमानाबाद, उड़ीसा के भद्रक और झारखंड के डालटनगंज के लिए एक-एक रैक भेजी जा चुकी है। डालटनगंज जाने वाली दूसरी रैक को भी रवाना किया जा चुका है। अन्य राज्यों को भी एफसीआई बीना मालगोदाम के रैक के माध्यम से गेहूं भेज रही है।

बीना से 16 लाख 38 हजार क्विंटल गेहूं भेजा जाएगा
एफसीआई के अधिकारियों के अनुसार सागर जिले के बीना मालगोदाम से देश के दूसरे राज्यों में 60 रैक के माध्यम से 16 लाख 38 हजार क्विंटल गेहूं भेजने की तैयारी है। एक रैक से औसतन 27300 क्विंटल गेहूं रखा जाता है। गेहूं के निर्यात से मप्र सहित रेलवे को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है।
अन्य राज्य मप्र से क्यों खरीद रहे गेहूं
मप्र में गेहूं का रकबा काफी बडा है। यहां पर्याप्त मात्रा में गेंहू का उत्पादन होता है। सबसे अहम बात मप्र और खसतौर से बुंदेलखंड इलाके में गेहूं की फसल में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का उपयोग अन्य राज्यों की तुलना में कम होता है। जबकि सबसे बड़े गेहूं उत्पादक पंजाब व हरियाणा में इनका उपयोग बेहतहाशा हो रहा है। इस कारण मप्र के गेहूं की मांग अन्य राज्यों में ज्यादा है।
रेलवे के लिए कुबेर का खजाना साबित हो रही घाटे वाली गोदाम
सागर जिले के बीना रेलवे जंग्शन की माल गोदाम को कुछ समय पहले रेलवे ने घाटे में दिखाते हुए बंद करा दिया था। अब गेहूं की डिमांड आने और यहां से रैक लोड होने के कारण रेलवे ने इस मालगोदाम को दोबारा खोल दिया है। यहां से लोड होने वाले एक रैक से औसतन 40 लाख किराया मिलता है। केरला की तरफ जाने वाले रैक का किराया तो 60 लाख तक होता है। इस लिहाज से सीजन भर में यहां से अन्य राज्यों के जो गेहूं के रैक भेजे जाएंगे उससे रेलवे को करीब 30 करोड़ तो एफसीआई को 24 करोड़ रुपए के आसपास आय होगी। बीना के अलावा रेलवे के कुरवाई सहित अन्य मालगोदाम से भी गेहूं के रैक भेजे जा रहे हैं।
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