MP News: श्योपुर में बारिश बनी कहर, मध्य प्रदेश और राजस्थान का संपर्क टूटा, फसलें तबाह, हाईवे बंद
MP News: मध्य प्रदेश में मानसून की पहली ही बड़ी बारिश ने कई जिलों में तबाही मचा दी है, जिसमें श्योपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बीते तीन दिनों से लगातार हो रही भीषण बारिश के चलते पार्वती नदी उफान पर है और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (NH-52) पर बने खतौली पुल के डूब जाने से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।
हालात चिंताजनक: जिले के 13 गांव कटे, यातायात 18 घंटे ठप
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, पार्वती नदी के जलस्तर में आई तेजी से वृद्धि के कारण खतौली पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इसके चलते श्योपुर और राजस्थान के बारां जिले के बीच चलने वाला NH-52 कम से कम 18 घंटे तक बंद रहा। इस दौरान सैकड़ों वाहन फंसे रहे, और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से गुज़रने को मजबूर होना पड़ा।

बारिश की वजह से श्योपुर जिले के 13 गांव जिला मुख्यालय से कट चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क भी बाधित है, जिससे आपात स्थिति में सूचना पहुंचने में देरी हो रही है।
फसलों पर कहर: सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसल बर्बाद
- बारिश से खरीफ सीजन की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
- श्योपुर, शिवपुरी और अशोकनगर में कई किसानों की सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसल जलमग्न हो चुकी है।
- जलभराव की स्थिति ऐसी है कि कई खेतों में बोई गई फसलें सड़ने लगी हैं।
श्योपुर के किसान रमेश मीणा कहते हैं, "हमने पिछले हफ्ते ही बीज डाले थे, लेकिन अब खेतों में पानी भर गया है। न तो ट्रैक्टर जा सकता है, न बैल। अब दोबारा बोनी करने की हालत नहीं है।"
- हादसे और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त
- शिवपुरी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली रपटे को पार करते समय बह गई, हालांकि समय रहते चार लोगों को बचा लिया गया।
- श्योपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी जलभराव से स्कूल-कॉलेजों को बंद करना पड़ा है।
- कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
मौसम विभाग का अलर्ट: राहत के आसार नहीं
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश के श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और आसपास के क्षेत्रों में अगले 5 दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर राजस्थान, झारखंड और बिहार में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है, जिसका असर मप्र पर भी पड़ा है। राजस्थान के कई हिस्सों-कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, टोंक-में 115 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
प्रशासन की तैयारी और सीमाएं
- जल संसाधन विभाग ने राजगढ़ और कालीसिंध बांध के गेट खोल दिए हैं, ताकि बांध पर दबाव कम हो सके।
- रेस्क्यू टीमें श्योपुर और शिवपुरी में तैनात की गई हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
- प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और मांग
किसानों और ग्रामीणों में सरकार से फसल बीमा, आर्थिक सहायता और राहत शिविरों की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने बयान जारी कर कहा, "सरकार को तत्काल फसल क्षति का आकलन कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। जल, जंगल, जमीन से जुड़ी आबादी संकट में है और सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रही है।"












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