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MP News: कोदो की फसल में पेस्टिसाइड के उपयोग के सबूत नहीं, फिर हाथियों की मौत कैसे हुई, CM यादव का बड़ा बयान

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की संदिग्ध मौत के मामले में नवीनतम जानकारी से पता चलता है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह कहा गया था कि कोदो की फसल में मौजूद पेस्टिसाइड के कारण यह घटना हुई। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ट्वीट करके स्पष्ट किया कि कोदो की फसल में पेस्टिसाइड के उपयोग के कोई सबूत नहीं मिले हैं। इससे यह बड़ा सवाल उठता है कि आखिर हाथियों की मौत कैसे हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाथियों के पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट 2-3 दिन में उपलब्ध हो सकती है। इस बीच, सीएम की नाराजगी का कारण यह है कि बांधवगढ़ में हाथियों की मौत की खबर सुनने के बाद फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी ने फोन बंद कर लिया, और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) फतेसिंह निनामा ने स्थिति को अपने जूनियर स्टाफ पर छोड़ दिया।

Pesticide not used in Kodo crop how did the elephant incident happen in Bandhavgarh CM Mohan Yadav

अधिकारियों पर कार्रवाई

सीएम ने इस लापरवाही के लिए फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी और एसीएफ फतेसिंह निनामा को सस्पेंड करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश में एक राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश भी दिए, ताकि हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सके।

जांच और रेस्क्यू ऑपरेशन

सीएम ने वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, एसीएस वन अशोक वर्णवाल, और पीसीसीएफ असीम श्रीवास्तव को जांच के लिए बांधवगढ़ भेजा था। रविवार को इन अधिकारियों की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। वहीं, हाथियों द्वारा मारे गए लोगों के परिजनों को पहले की घोषणा के मुकाबले 8 लाख रुपए की जगह अब 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

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लापरवाही के लिए सस्पेंड किए गए अधिकारियों पर क्यों हुई कार्रवाई

1. फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी:

गौरव चौधरी की लापरवाही इस मामले में विशेष रूप से चिंताजनक रही। घटनाक्रम से पहले वह अवकाश पर थे और हाथियों की मौत की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने ज्वॉइन नहीं किया। इस दौरान उन्होंने अपना मोबाइल भी बंद कर रखा था, जिससे स्थिति की गंभीरता को समझने में कठिनाई हुई। उनकी इस लापरवाही ने न केवल घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई को प्रभावित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि वह अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग नहीं थे।

2. सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) फतेसिंह निनामा:

फतेसिंह निनामा ने भी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर लापरवाही दिखाई। घटना के बाद उन्होंने होने वाली जांच को नजरअंदाज किया और कार्रवाई का जिम्मा अपने जूनियर स्टाफ पर छोड़ दिया। इसके अलावा, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की सही जानकारी भी नहीं दी, जिससे स्थिति को ठीक से संभालने में मुश्किल हुई। उनकी यह लापरवाही जांच प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

सोलर फेंसिंग और हाथी मित्रों का गठन

मुख्यमंत्री ने बफर एरिया और मैदानी इलाकों में फसलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को सोलर फेंसिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम किसानों की फसलों को हाथियों के हमलों से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। इसके साथ ही, हाथी मित्रों का एक दल भी बनाने का निर्णय लिया गया है, जो लोगों को हाथियों के साथ सह-अस्तित्व के बारे में जागरूक करेगा और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।

आर्थिक सहायता में वृद्धि, मृत्यु पर पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये

हाथियों के हमलों की घटनाओं में जनहानि की स्थिति में प्रदेश सरकार ने आर्थिक सहायता को 8 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। हाल ही में हुई दो व्यक्तियों की मृत्यु पर पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। यह कदम सरकार की ओर से हाथियों के साथ मानव सह-अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

विशेषज्ञों की मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है। इन विशेषज्ञों की मदद से अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जाएंगी, जो मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में सहायक होंगी।

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