Panna Tiger Reserve: सबसे बुजुर्ग बाघिन T-1 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, 10 दिन पुराना शव मिला
पन्ना में क्वीन आफ पन्ना टाइगर रिजर्व और मदर आफ पन्ना टाइगर्स के नाम से विख्यात पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की दादी बाघिन टी—1 की मौत की दुखद खबर सामने आई है। रेडियो कॉलर होने के बाद भी 10 दिन बाद मौत का पता चल सका।

टाइगर स्टेट मप्र के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की जननी, दादी आफ टाइगर्स, क्वीन आफ पन्न टाइगर्स, मदर आफ पन्ना टाइगर के नाम से विख्यात बाघिन टी-1 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सबसे ज्यादा हैरत और दुखद पहलू यह है कि मौत के 10 दिन बाद हाईवे के पास मनोर गांव के निकट उसका सड़ा-गला शव मिला है, जबकि उसके गले में रेडियो कॉलर लगा हुआ था। पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा ने बाघिन की मौत की अधिकृत रुप से पुष्टि की है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बीते दो महीने में तीसरे टाइगर की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। पीटीआर को जीरो से 80 बाघों तक पहुंचाने वाली बाघिन टी-1 अब नहीं रही। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पीटीआर प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह रहा कि 10 दिन पूर्व हुई बाघिन की मौत के बाद बुधवार को उसका शव मिल सका है। रेडियो कॉलर होने और उसके मूवमेंट को लेकर विभाग ने जानकारी जुटाने तक की जहमत नहीं उठाई। बुधवार को नेशनल हाईवे 39 के निकट मनोर गांव इलाके में हाईवे से महज 30 मीटर अंद जंगल में उसका लगभग कंकाल हो चुका शव मिला है। बाघिन की उम्र 16 से 17 साल के आसपास बताई जा रही है।

बाघिन टी-1 और बाघ टी-3 की संतानें है सारे टाइगर
बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन प्रोग्राम के तहत साल 2008-09 में यहां बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो बाघिन और एक बाघ को लगाया गया था। बाघिन टी-1 और बाघ टी-3 के पहले लिटर से साल 2010 में पन्ना के जंगलों में तीन शावकों ने जन्म लिया था। बाघिन टी-1 ने करीब 15 शावकों को जन्म दिया था, वर्तमान में पीटीआर में मौजूद अधिकांश युवा बाघों की मां और दादी होने का सौभाग्य उसी को प्राप्त था। बाकी बाघिन की बजाय टी-1 काफी शांत स्वभाव की थी।
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गले में रेडियो कॉलर, फिर भी मौत का पता नहीं चला
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक तो हाईवे के नजदीक मनोर गांव इलाके में हाईवे से चंद मीटर की दूरी पर उसका शव 10 दिन तक पड़ा होने के बाद भी फील्ड स्टाफ को भनक तक नहीं लग सकी। दूसरी उसके गले में रेडियो कॉलर लगा था, बावजूद इसके उसके एक ही प्वाइंट पर स्थित होने, कोई मूवमेंट न होने पर उसकी जानकारी जुटाने जैसा कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट रुप से नजर आ रही है। सबसे अहम बाद बाघिन की मौत की जानकारी आसपास के गांव के लोगों द्वारा दी गई, जो लकड़ी बीनने से जंगल के इलाके में गए थे।
टाइगर स्टेट मप्र के पन्ना में दो महीने में तीन बाघों की मौत
टाइगर स्टेट मप्र के पन्ना टाइगर रिजर्व में अप्रत्याशित रूप से महज दो महीने में तीन बाघों की मौत का मामला सामने आ चुका है। सबसे बड़ी बात पन्ना में बीते दो महीनों में दो युवा बाघों का शिकार किया गया है। इसमें एक नर युवा बाघ को गले में फंदा लगाकर तो दूसरे बाघ को करंट लगाकर जान ली गई थी।












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