MP News: 5 किलो के नूरजहां आम को मिला खास अवॉर्ड, आकार देख हर कोई चौंका
इंदौर में संभागायुक्त दीपक सिंह के मार्गदर्शन में संभाग के अलीराजपुर जिले में आम प्रजाति को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे है। कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर के दिशा निर्देशन में अलीराजपुर जिले के दो आम उत्पादक उन्नत कृषकों ने राष्ट्रीय आम महोत्सव रायपुर छत्तीसगढ में सहभागिता की है।
उक्त दोनों कृषकों को राष्ट्रीय आम महोत्सव में 10 पुरस्कार मिले, जो अलीराजपुर जिले सहित पूरे संभाग के लिए गर्व की बात है। संभागायुक्त सिंह, कलेक्टर डॉ. बेडेकर सहित अन्य अधिकारीगण ने दोनों कृषकों को बधाई दी है।

अलीराजपुर जिले के ग्राम छोटा उंडवा निवासी कृषक युवराजसिंह राठौर को राष्ट्रीय आम महोत्सव में विभिन्न आम प्रजाति के तहतं अलग-अलग श्रेणी में 7 पुरस्कार मिले। उन्हें आम्रपाली, पुसा अरूणिमा, रुमानी (लड्डू), पायरी आम की प्रजाति के लिए प्रथम पुरस्कार मिले। मल्लिका और हापुस प्रजाति के आम के लिए द्वितीय एवं केसर प्रजाति के आम के लिए सांत्वना पुरस्कार मिला। जोबट के ग्राम काली खेतर निवासी उन्नत कृषक श्री प्रदीप सिंह राठौर को 3 पुरस्कार मिले। उन्हें नूरजहां, केसर एवं सिन्दूरा की आम प्रजाति के लिए प्रथम पुरस्कार मिला।
राष्ट्रीय आम महोत्सव रायपुर में 8 राज्यों मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के करीब 500 कृषकों ने उन्नत एवं देशी आम की करीब 350 प्रजाति के आम के स्टॉल लगाए थे।
उल्लेखनीय है कि, तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन रायपुर छत्तीसगढ में हुआ। यह आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय रायपुर द्वारा आयोजित किया गया था। आम महोत्सव में अलीराजपुर जिले के आम विशेष आकर्षण का केन्द्र रहें। उक्त कृषकों को आम महोत्सव में सहभागिता के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र अलीराजपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर. के. यादव ने प्रोत्साहित करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया।
वैसे तो आपने आम की कई अलग-अलग तरह की किस्म देखी होगी, लेकिन मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के कट्ठीवाड़ा इलाके में एक ऐसा आम चर्चाओं में बना रहता है, जिसका वजन लगभग 5 किलो के आसपास होता है। इस आम को नूरजहां के नाम से देश और दुनिया में पहचाना जाता है, जहां नूरजहां आम की लगातार डिमांड बढ़ रही है। आलीराजपुर ज़िले में आम की प्रसिद्ध किस्म नूरजहाँ के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीक़े से प्रयास होना चाहिए। यह चिंता का विषय है कि इस आम के गिनती के पेड़ बचे हैं।
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