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MP News: भारत में आतंकवादियों को न नमाज, न कब्र, AIIO के चीफ इलियासी का फतवा, POK को भारत में मिलाने की मांग

MP News: भारत में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी धार्मिक घोषणा सामने आई है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन (AIIO) के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने शनिवार को ग्वालियर में एक ऐतिहासिक बयान देते हुए आतंकवाद के खिलाफ धार्मिक फतवा जारी किया। इस फतवे के अनुसार, अब भारत में किसी भी आतंकवादी का जनाजा नहीं पढ़ा जाएगा, और उन्हें देश की धरती पर दफनाने की इजाजत भी नहीं होगी।

इमाम इलियासी ने साफ कहा कि: "इस्लाम का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। आतंकवाद के नाम पर इस्लाम को बदनाम करने वालों को इस देश की सरज़मीं पर सम्मान नहीं मिलेगा। जो इंसानियत का कत्ल करता है, वह मुसलमान नहीं हो सकता।"

AIIO Chief Imam fatwa Terrorists will not be buried in India nor will they be offered prayers

आतंकवाद के खिलाफ फतवा: "न नमाज, न दफन"

इमाम उमर अहमद इलियासी ने ग्वालियर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी करते हुए कहा, "आतंकवादी जो मासूमों का खून बहाते हैं, उन्हें इस्लाम में कोई जगह नहीं है। उनके जनाजे की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी, और भारत की धरती पर उन्हें दफनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुई आतंकी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवादी संगठन, जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा, इस्लाम का नाम बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि इस्लाम शांति, प्रेम और सहिष्णुता का धर्म है, और आतंकवाद इसका पूरी तरह से उल्लंघन है।

इलियासी ने पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की, जिसमें सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ सटीक और कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हमारी सेना ने जिस तरह आतंकवाद को कुचला है, वह गर्व की बात है। यह ऑपरेशन देश की एकता और सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर है।" उन्होंने दिल्ली में AIIO के इमाम हाउस में आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी धर्मों के नेताओं ने पहलगाम हमले के पीड़ितों के लिए प्रार्थना की और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई।

बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन

इलियासी ने बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "बलूचिस्तान में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों पर हो रहे अत्याचार अस्वीकार्य हैं। हर व्यक्ति को अपनी आजादी का हक है, और बलूचिस्तान को भी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।" यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान के मुद्दे को और मजबूती देता है। इलियासी ने बलूचिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि इस्लाम किसी भी तरह के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करता, और बलूचिस्तान के लोगों का संघर्ष जायज है।

AIIO Chief Imam fatwa: लव जिहाद पर चिंता

मध्य प्रदेश में बढ़ रहे लव जिहाद के मामलों पर इलियासी ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "कुछ लोग अपनी पहचान और नाम छुपाकर शादी करते हैं, जो न केवल गलत है, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी तोड़ता है।" उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसी गतिविधियों पर नजर रखी जाए और पारदर्शिता के साथ रिश्ते स्थापित किए जाएं। यह बयान मध्य प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ चल रही बहस को और हवा दे सकता है, जहां हाल के वर्षों में इस मुद्दे पर कड़े कानून लागू किए गए हैं।

AIIO Chief Imam fatwa: POK को भारत में शामिल करने की मांग

इलियासी ने पाक अधिकृत कश्मीर (POK) को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा, "POK भारत का हिस्सा है, और इसे जल्द से जल्द भारत में वापस शामिल करना चाहिए।" उन्होंने भारतीय सेना की कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आतंकी अड्डों को नष्ट किया जा चुका है, और अब समय आ गया है कि बचे हुए अड्डों को भी खत्म किया जाए। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की, ताकि कश्मीर पूरी तरह से आतंकवाद से मुक्त हो सके।

इमाम उमर अहमद इलियासी, शांति और एकता के दूत

डॉ. उमर अहमद इलियासी, AIIO के चीफ इमाम, लंबे समय से शांति, अंतरधार्मिक सद्भाव, और राष्ट्रीय एकता के लिए काम कर रहे हैं। AIIO, जो भारत के 5 लाख इमामों और 21 करोड़ मुस्लिमों की आवाज है, दुनिया का सबसे बड़ा इमाम संगठन माना जाता है। इलियासी को उनकी शांति और सद्भाव की पहल के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों पुरस्कार मिले हैं, जिनमें अबू धाबी और UAE के सर्वोच्च नागरिक सम्मान शामिल हैं।

इलियासी पहले भी अपने साहसिक रुख के लिए चर्चा में रहे हैं। जनवरी 2024 में, अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने के लिए उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया था। उन्होंने उस समय कहा था, "यह सनातन भारत है, कोई इस्लामी देश नहीं। मैंने प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया है, और इसके लिए मैं माफी नहीं मांगूंगा।" इस बार भी, आतंकवाद के खिलाफ उनके फतवे और बलूचिस्तान-POK पर बयानों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

इलियासी का यह फतवा और उनके बयान न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी गहरे प्रभाव डाल सकते हैं।

आतंकवाद पर रुख: आतंकवादियों को नमाज और दफन से वंचित करने का फतवा इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने वालों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। यह भारत के मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद से अलग करने और शांति का संदेश देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बलूचिस्तान और POK: बलूचिस्तान की आजादी और POK की वापसी की मांग ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को हवा दी है। यह भारत सरकार की विदेश नीति और कश्मीर मुद्दे पर चल रही बहस को और मजबूती दे सकता है।

लव जिहाद: मध्य प्रदेश में लव जिहाद पर उनके बयान से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्थन मिल सकता है, जो इस मुद्दे पर पहले से सख्त कानून लागू कर चुकी है। हालांकि, विपक्षी दल इसे धार्मिक ध्रुवीकरण के रूप में देख सकते हैं।

इलियासी के इस फतवे और बयानों से कई संभावनाएं सामने आती हैं:

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता: यह फतवा भारत के मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करने में मदद कर सकता है। मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज में इस मुद्दे पर और जागरूकता फैलाई जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभाव: बलूचिस्तान और POK पर उनके बयान भारत की विदेश नीति को मजबूती दे सकते हैं, खासकर संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर।
मध्य प्रदेश में लव जिहाद पर कार्रवाई: उनके बयान से मध्य प्रदेश सरकार को लव जिहाद के खिलाफ और सख्त कदम उठाने का आधार मिल सकता है।
अंतरधार्मिक सद्भाव: इलियासी की शांति और सहिष्णुता की अपील से भारत में अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि उन्होंने राम मंदिर समारोह में भाग लेकर दिखाया था

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