MP News: इस जिले में गर्मी बरपाएगी कहर, स्कूलों का टाइमिंग बदला, अलर्ट जारी
मध्यप्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के दौरान बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले में बच्चों के हित में स्कूलों के संचालन के समय में बदलाव किया गया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है।
मध्यप्रदेश में बढ़ते तापमान को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रीष्म ऋतु में लू (तापघात) के प्रकोप से बचाव हेतु एडवायजरी जारी की गई है। लू (तापघात) से बचाव एवं उपचार हेतु जारी एडवायजरी में दिये गये सुझावों का पालन करें।

स्कूलों का बदला समय
वर्तमान में भीषण गर्मी एवं लू की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुये छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए छात्रहित में जिला शिक्षा अधिकारी श्री पी एस सोलंकी ने "नवीन शिक्षा सत्र 2025" में 30 अप्रैल तक कक्षाओं के संचालन का समय परिवर्तित किया है। उन्होंने बताया कि समस्त शासकीय, अशासकीय (म०प्र० शासन द्वारा मान्यता प्राप्त एवं सी.बी.एस.ई. सहित) शालाएँ पहली से हायर सेकेण्डरी तक की कक्षाओं का संचालन प्रातः 07.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक किया जायेगा।
लू की संभावना से बचाव और उपचार संबंधी एडवाइजरी जारी
इस संबंध मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा दी गई सलाह में कहा गया है कि, ऐसे शुष्क वातावरण में लू (तापघात) की संभावना जानलेवा हो सकती है। इससे बचाव के लिए गर्मी के दिनों में धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के डील सूती वस्त्रों का प्रयोग करें। भोजन करके एवं पानी पीकर ही बाहर निकले। गर्मी के मौसम में गर्दन के पिछले भाग, कान व सिर को गमछे या तौलिये से ढक कर ही धूप में निकले। रंगीन चश्मे व छतरी का प्रयोग करें। गर्मी में हमेशा पानी अधिक मात्रा में पीयें एवं पेय पदार्थों का अधिक से अधिक मात्रा में सेवन करें। बाहर जाते समय अपने साथ पानी रखें। गर्मी के दिनों में बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को सिखाये कि जब भी उन्हें अधिक गर्मी महसूस हो तो वे तुरंत घर के अंदर आएं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सिसोदिया द्वारा आम जन को सलाह दी गई है कि गर्मी के दिनों में बुजुर्गों का भी विशेष ध्यान रखें। उन्हें धूप में घर से बाहर न निकलने दें व उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें एवं सुपाच्य भोजन तथा तरल पदार्थों का सेवन करवाये। गर्मी के दिनों में ठंडे मौसमी फलों का सेवन करें। गर्मी के दिनों में तीव्र धूप को अंदर आने से रोके। जहां तक संभव हो, ज्यादा समय तक धूप में खड़े होकर व्यायाम मेहनत एवं अन्य कार्य न करें। बहुत अधिक भीड, गर्म घुटन भरे कमरों में ना जाएं। रेल, बस आदि की यात्रा गर्मी के मौसम में अतिआवश्यक होने पर ही करें। बच्चों एवं बुजुर्गों को दिन के सबसे गर्म समय जैसे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर की गतिविधियों में शामिल ना होने दें। धूप में बच्चों और पालतू जानवरों को गाडी में अकेला न छोड़ें। धूप में नंगे पांव न चले। चाय कॉफी अत्यधिक मीठे पदार्थ व गैस वाले पेय पदार्थों का सेवन न करें।
लू लगने के लक्षण गर्म लाल और सूखी त्वचा होना, शरीर का तापमान से 40 सेल्सियस या 104 फॉरेनाइट से अधिक होना, मतली या उल्टी, बहुत तेज सिर दर्द होना, मांशपेशियों में कमजोरी या ऐठन,सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट होना, चक्कर आना, बेहोशी और हल्का सिरदर्द होना आदि है।
लू तापघात से प्रभावित व्यक्ति के प्राथमिक उपचार के तरीके
लू लगने पर रोगी को तुरंत छायादार जगह पर, कपड़े ढीले कर लिटा दें एवं हवा करें। रोगी के बेहोश होने की स्थिति में कोई भी भोज्य एवं पेय पदार्थ ना दे एवं तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। रोगी के होश में आने की दशा में उसे ठंडे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल एवं कच्चा आम का शर्बत (पना) आदि दें। रोगी के शरीर का ताप कम करने के लिये यदि संभव हो तो उसे ठंडे पानी से स्नान कराये या उसके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखकर पूरे शरीर को ढक दें। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक की शरीर का ताप कम नहीं हो जाता है।
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