Damoh: जंगल में खाट पर प्रसव, एक घण्टे बाद आई जननी एम्बुलेंस, माँ की हालत गंभीर
सागर, 18 सितंबर। मप्र के बुन्देलखण्ड के जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी चरमराई हुई हैं। तमाम दावों के बीच आज भी अंदरूनी गांवों में महिलाओं के प्रसव सड़क पर हो रहे हैं। दमोह जिले से ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पटेरा ब्लॉक के ग्वारी गांव में एक प्रसूता को परिजन 5 किलोमीटर तक खाट पर लिटाकर जंगल के संकरे रास्ते से मुख्यमार्ग तक ले गए। इस दौरान घने जंगल के बीच चारपाई पर ही महिला का प्रसव हो गया। बाद में करीब एक घण्टे बाद एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा सका।

जिला अस्पताल दमोह से मिली जानकारी अनुसार पटेरा ब्लॉक में जोगी डाबर पंचायत के ग्वारी गांव निवासी में पप्पू आदिवासी की पत्नी ननहींबाई आदिवासी का प्रसव के समय चल रहा था। उसे तेज़ प्रसव पीड़ा होने के बाद परिजन ने जननी एम्बुलेंस को फोन लगाया तो सड़क खराब होने के कारण एम्बुलेंस नहीं आ सकी। परिजन उसे खाट पर लिटाकर करीब पांच किलोमीटर दूर कुम्हारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने लगे। दलदली और कीचड़ भरे रास्ते से चार पाई कंधों पर उठाकर परिजन उसे जंगली इलाके से ले जा रहे थे, तभी उसको तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। कुछ समय बाद वहीं जंगल के बीच रास्ते में ही चार पाई पर उसका प्रसव हो गया। साथ मे मौजूद सास ने बहू और नवजात को संभाला। करीब एक घण्टे बाद उन्हें एम्बुलेंस मिल सकी।

कुम्हारी अस्पताल में हालात गंभीर, जिला अस्पताल रेफर किया
प्रसूता नन्हीबाई की सास आशारानी के अनुसार कुम्हारी में डॉक्टरों ने बताया कि बहू को खून की कमी है। ब्लीडिंग भी ज्यादा हुई है। गम्भीर हालात के चलते उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां भर्ती कर इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने हालात गम्भीर बताई है।
सैकड़ों अंदरूनी गांव आज भी सड़क विहीन
दमोह जिले में आज भी सैकड़ों गांव ऐसे हैं, जहां बारिश के दौरान वाहनों का आना-जाना बंद हो जाता है। तेज बारिश व मानसून में गांव का जीवन कठिन और आवागमन ठप हो जाता है। प्रसव, बीमारी में इलाज मिलना तक दूभर हो जाता है।












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