श्यामा प्रसाद मुखर्जी को CM मोहन यादव ने किया यादव, कहा- धारा 370 हटाना सच्ची श्रद्धांजलि
MP News: महानायक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आजादी के पहले और आजादी के तुरंत बाद देश के सामने आने वाली चुनौतियां के संबंध में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। बंग-भंग योजना की विभीषिका का आंकलन और जम्मू कश्मीर की चुनौती को समय रहते भांप लेना डॉ. मुखर्जी जैसे महापुरुष के लिए ही संभव था। यह बात मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डॉ. मुखर्जी के शहादत दिवस समारोह के दौरान यह बात कही।
सीएम मोहन यादव ने रविवार 23 जून को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, भाजपा कार्यालय के निकट स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी 33 साल की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बाद में उन्होंने मंत्री पद संभाला और अपनी योग्यताओं को और साबित किया।

जम्मू और कश्मीर के प्रति डॉ. मुखर्जी की प्रतिबद्धता
डॉ. यादव ने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर की ओर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कोलकाता में डॉ. मुखर्जी ने इस क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि वे इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे और उन्होंने वास्तव में अपना वादा पूरा किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. मुखर्जी के जीवन के वीरतापूर्ण पहलुओं को पहचानने और बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना डॉ. मुखर्जी की विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण कदम के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दृष्टिकोण और प्रयासों के प्रति उचित सम्मान बताया। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह सभी का कर्तव्य है कि डॉ. मुखर्जी के साहसिक कार्यों को उजागर किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भावी पीढ़ियां राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को समझ सकें।
डॉ. यादव ने अपने भाषण के समापन में लोगों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उपलब्धियों को याद करने और उनका जश्न मनाने का आग्रह किया, जिन्होंने आधुनिक भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।












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