MP assembly election 2023: ‘प्राण जाये पर वचन न जाये' जैसा है क्या कांग्रेस का 'वचन-पत्र'? कमलनाथ का वादा
MP assembly election 2023: 'वचन' यानि कही गई बात को किसी भी कीमत में पूरा करना। जिसे प्रतिज्ञा या शपथ भी कहा जाता हैं। सियासत के वचन, आम जिंदगी में लिए-दिए जाने वाले 'वचन' से अलग नहीं हो सकते। शायद इसलिए मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की बेला में कांग्रेस द्वारा जारी किया गया 'वचन-पत्र' चर्चाओं में हैं।
चुनाव घोषणा से पहले ही पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमलनाथ, सरकार बनने पर जनता को 11 वचन दे चुके थे। जिसमें से कई वचनों को राहुल और प्रियंका गांधी सभाओं के जरिए दोहराते आए। अब 1290 वचनों का पुलिंदा हैं।
वचन पत्र में सात अलग-अलग वर्ग, 59 विषय और 225 बिंदु हैं। जिसके बारे में कमलनाथ ने भी बताया कि उन्होंने लगभग नौ हजार से ज्यादा सुझावों पर अमल करने के बाद वचन-पत्र बना और चुनाव में लांच किया। इस घोषणा पत्र में कई दमदार बातें भी हैं, तो कुछ ऐसे वचन, जो परंपरागत रहे और जैसे इबारत का नया जिल्द चढ़ा हैं। 'डायलॉग' कैसे कोई भूल सकता है कि 'प्राण जाये पर वचन न जाये'।

सियासत के जानकार भी अगले पांच सालों में पूरे होने वाले इन वचनों के दावे से भौंचक हैं। सियासी पंडित अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। पढ़ने-सुनने में जरुरतमंदो को इन वचनों से जितना अभी सुकून लग रहा हैं, ऐसा ही दिल आने वाले वक्त में कितना सुकूनभरा होगा? इस पर भी सियासतदान चर्चा कर रहे हैं। हालांकि बीजेपी भी पीछे नहीं रही चुनाव घोषणा के पहले लोकलुभावन धुआंधार घोषणाओं का दौर चला। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस के पास चुनाव के वक्त 'वचन-पत्र' और 15 महीने की सरकार के सिवाय कोई दूसरा सहारा भी नहीं, जिसकी दम पर वह जनता के बीच सीना तानकर पहुंच सकें। बीजेपी 'नाथ' के भरोसे पर चुटकियां ले रही हैं, तो कांग्रेस भी बीजेपी को नसीहत देने में पीछे नहीं।
सवाल हो रहा है कि प्रतिज्ञा पूरा करने के संसाधन कैसे जुटेंगे? कौन सी जादू की छड़ी होगी, जिससे करोड़ों-अरबों के बजट के लिए खजाना खुल जाएगा। क्योकि चुनाव घोषणा से ठीक महीने भर पहले मध्य प्रदेश ने 500 करोड़ का कर्ज लिया। मौजूदा साल में अप्रैल, जुलाई, अगस्त को छोड़ हर महीने कर्ज की फाइल बढ़ती ही गई। इसके पीछे सरकारी घोषणाएं थी, जिन्हें हर हाल में पूरा करना शासन की मज़बूरी हैं।
कब कितना कर्ज
- -25 जनवरी 2023- 2000 करोड़
- -02 फरवरी 2023- 3000 करोड़
- -09 फरवरी 2023- 3000 करोड़
- -16 फरवरी 2023-3000 करोड़
- -23 फरवरी 2023- 3000 करोड़
- -02 मार्च 2023- 3000 करोड़
- -09 मार्च 2023- 2000 करोड़
- -17 मार्च 2023- 4000 करोड़
- -24 मार्च 2023- 1000 करोड़
- -29 मई 2023- 2000 करोड़
- -14 जून 2023- 4000 करोड़
- -12 सितंबर 2023 -1000 करोड़
आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले एमपी सरकार पर 3 लाख 32 हजार करोड़ के आसपास का कर्ज था। हर साल कर्ज पर 20 हजार करोड़ रुपये ब्याज में जाते हैं। पहले की देनदारी का पहाड़ हैं, ऊपर से नए वादे पूरे करने का खर्चा इंतजाम करना। राजनीतिक हालात आने वाले वक्त के कैसे होंगे, इसका कोई आंकलन नहीं कर सकता। लेकिन 'प्राण जाये पर वचन न जाये' वाला अंदाज निराला जरुर हैं।












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