MP पेपर लीक मामलाः विज्ञान के अलावा गणित, अंग्रेजी का पेपर भी किया था लीक, मोबाइल की फाॅरेंसिक जांच होगी
दमोह में 10वीं बोर्ड पेपर लीक मामले में डीईओ भी लपेटे में आ सकते हैं। दरअसल पेपर आउट होने के मामले में दोषी बनाए गए प्राचार्य की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में 10 वीं बोर्ड के विज्ञान विषय का पेपर लीक होने के मामले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस बारीकि से पूछताछ और सुराग तलाशने में जुटी है। मामले में सामने आया है कि सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य के कहने पर चपरासी ने विज्ञान ही नहीं गणित और अंग्रेजी का पेपर भी लीक किया था। चपरासी ने मोबाइल से व्हाट्सएप इमेज और गैलरी से पेपर की फोटे डिलेट कर दीं। अब इस मोबाइल की जांच भोपाल फाॅरेंसिक लैब से कराई जाएगी।
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा सैलवाड़ा हाई स्कूल से 10वीं के तीन पेपर लीक हुए थे। मुख्य आरोपी स्कूल के चपरासी ने इन्हें मोबाइल से फोटो लेकर निजी स्कूल के कर्मचारी को भेजा था। पुलिस सूत्रों की माने तो चपरासी छोटू रजक के सीने में कई राज दफन हैं। जिन दिन पेपर लीक कांड सामने आया उस दिन पूरे स्टाफ ने उसकी क्लास लगाते हुए फटकार लगाई थी। तब उसने स्वीकार किया था कि प्रचार्य केएल चैकसे के कहने पर वह गुरूकुल स्कूल से जुड़े सुदीप उर्फ भानू गर्ग के मोबाइल पर पेपर की फोटो खींचकर भेजता था। वह पहले गणित और अंग्रेजी का पेपर भी भेज चुका है।

पुलिस के हाथ इसमें कई अहम सुराग भी लगे हैं। मामले में छोटू रजक के अलावा सीएम राई प्राचार्य केएल चैकसे सहित गुरुकुल स्कूल की संचालिका सुधा त्रिपाठी हैं। गुरुकुल के भानू उर्फ सुदीप गर्ग को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने कुल आठ लोगों मामला दर्ज किया है। जिसमें से चार की गिरफ्तारी हो गई है, व दो को जेल भेजा गया और दो को रिमांड पर लिया गया है। वहीं मुख्य आरोपी का मोबाइल फाॅरेंसिक जांच के लिए भोपाल भेजा जा रहा है।
डीईओ भी जांच के घेरे में हैं
पेपर लीक मामले में प्राचार्य केएल चैकसे की पदस्थापना को लेकर डीईओ तक जांच के घेरे में हैं। दरअसल केएल चैकसे की पदस्थापना हाईस्कूल पतलौनी में प्रभारी प्राचार्य के रूप में हैं। इनका वेतन पतलौनी संकुल केंद्र से तेंदूखेड़ा ट्रांसफर होता रहा है। वह पहले माॅडल स्कूल के अतिरक्ति प्रभारी प्राचार्य बने, इसके बाद सीएम राइज स्कूल में कन्वर्ट होने से प्राचार्य की कुर्सी पर जमे रहे। इस तरह से नियम के विपरीत दो पदों पर सालों से जमेे है, इस कारण डीईओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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डीईओ को प्राचार्य की नियुक्ति करने का अधिकारी नहीं है
स्कूल शिक्षा विभाग के जेडी मनीष वर्मा बताते हैं कि सीएम राइज या हायर सेकंडरी स्कूल जैसे प्राचार्यों की नियुक्ति का अधिकारी किसी जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं है। यदि नियम विरुद्ध तरीके से ऐसे नियुक्तियां की गई हैं तो उसकी विधिवत जांच कराकर जो भी दोषी होंगे किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।
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