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कौन हैं मोदी कैबिनेट के ये मंत्री जो कभी साइकिल के पंचर ठीक करते थे, आज पुरानी स्कूटर की वजह से चर्चा में

Virendra Kumar Khatik: मध्य प्रदेश के डॉ. वीरेन्द्र खटीक एक बार फिर से मोदी सरकार में मंत्री बन गए हैं। टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र से आठवीं बार सांसद चुने गए वीरेंद्र खटीक लोकप्रिय नेता हैं। सागर में जन्मे वीरेंद्र खटीक को पिछली सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी।

लोकसभा चुनाव में टीकमगढ़ से 8 वीं बार सांसद चुने गए डॉ. वीरेंद्र कुमार बेहद सरल और सहज हैं। आम लोगों से खुलकर मिलते हैं। उन्होंने साइकिल का पंचर जोड़कर अपना परिवार चलाया है और आज भी मौका मिलते ही रिपयरिंग करने बैठ जाते हैं।

Virendra Kumar Khatik

डॉक्टर वीरेंद्र कुमार खटीक के पिता की सागर में पंचर बनाने की दुकान थी। वे भी पांचवी कक्षा से ही यह काम करने लगे। डॉ. वीरेंद्र खटीक ने पूरे एक दशक तक पंचर बनाकर और साइकिल रिपेयरिंग कर अपना घर चलाया। सागर के गौर मूर्ति के पास वे साइकिल रिपेयरिंग का काम करते थे।

डॉ. वीरेंद्र खटीक और उनके पिता दिनभर पंचर जोड़ने में लगे रहते थे। घर के साथ ही उनके भाई-बहन की पढ़ाई का खर्चा भी इसी कमाई से चलता था। सागर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान भी डॉ. वीरेंद्र खटीक को साइकिल रिपेयरिंग करनी पड़ी। काम में जरा सी लापरवाही पर उनके पिता जमकर डांट लगाते थे। सागर में 27 फरवरी 1954 को जन्मे वीरेंद्र खटीक की पत्नी कमल खटीक आम घरेलू महिला हैं। उनका एक पुत्र और एक पुत्री है।

वीरेंद्र कुमार 11वीं लोकसभा में चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने थे। वे तब सागर लोकसभा सीट से जीते थे। इसके बाद 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में भी सागर से ही सांसद बने। परिसीमन होने के बाद वे टीकमगढ़ सीट से चुनाव मैदान में उतरने लगे। 15वीं, 16वीं और 17वीं लोकसभा में टीकमगढ़ से सांसद रहे हैं। पिछली बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थे।

केंद्र में मंत्री होने के बाद भी उनकी सादगी बनी रही। वे आज भी खुद ही साइकिल की रिपेयरिंग कर लेते हैं। साइकिल की दुकान पर जाकर युवाओं को पंचर बनाना सिखाने लगते हैं।

दिग्गज नेता आज भी अपने पुराने और संघर्ष के दिनों के स्कूटर पर सवार होकर क्षेत्र में आम जनता का हाल जानने निकल जाते हैं। शायद यही वजह है कि 1996 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे वीरेंद्र कुमार खटीक ने आज तक लौटकर नहीं देखा।

केंद्रीय मंत्री होने के बाद भी वे बिना सुरक्षा क्षेत्र में घूमते रहते हैं। बाइक, स्कूटर घूमते मिल जाते हैं। यहां तक की सब्जी लेने भी पहुंच जाते हैं। वे लोगों से लगातार संवाद करते रहते हैं। आमजन से उनका सीधा जुड़ाव है।

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