EXCLUSIVE: शिवराज के एमपी में गरीब की बेबसी का फायदा उठाकर प्राइवेट अस्पताल लूट रहे सरकारी धन

वनइंडिया ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जीवाड़े का ऐसा मामला पकड़ा है, जिसमें गरीब मरीज को बढ़िया इलाज का लालच देकर सरकारी धन की लूट की जा रही थी...

भोपाल, 21 अप्रैल। प्राइवेट अस्पतालों में अब तक मेडिकल इंश्योरेंस के नाम पर मरीज के साथ गैरजरूरी जांचें कर अनाप-शनाप बिल बनाने और मरीजों को जबरन अस्पताल में भर्ती रखने के मामले सामने आते थे। लेकिन, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जीवाड़े का एकदम नया मामला सामने आया है। बेबस गरीब मरीज को बढ़िया इलाज के साथ पैसों का लालच देकर सरकारी धन की लूट की गई। प्राइवेट अस्पताल, दलालों के जरिये किस तरह गरीबों की लाचारी का फायदा उठाकर सरकारी धन की लूट कर रहे हैं, वनइंडिया ने इसका भंडाफोड़ किया है।

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    EXCLUSIVE: शिवराज के एमपी में गरीब की बेबसी का फायदा उठाकर प्राइवेट अस्पताल लूट रहे सरकारी धन
    क्या है योजना?

    क्या है योजना?

    गंभीर बीमारियों का इलाज करवाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती मरीज की जांचें और तमाम रिपोर्ट्स को पेश करना होता है। विधायक स्तर का कोई जनप्रतिनिधि इन रिपोर्टों के आधार पर मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता के लिए अनुशंसा करता है और फिर इस अनुशंसा और बीमारी की गंभीरता और उसमें आ रहे संभावित खर्चे की जो रिपोर्ट अस्पताल की तरफ से मुख्यमंत्री कार्यालय को पेश की जाती है, उसके आधार पर अस्पताल के खाते में एक वाजिब धनराशि आवंटित कर दी जाती है।

    गरीब की बीमारी और गरीबी का उठाया फायदा

    गरीब की बीमारी और गरीबी का उठाया फायदा

    राजधानी भोपाल के पुष्पानगर, ऐशबाग कॉलोनी में छोटी सी दुकान चलाने वाले मनोहर शाक्य को कुछ दिनों से पेट में दर्द था। मनोहर की बैंकों से लोन दिलाने वाले दलाल जितेंद्र से जान पहचान थी, जिनसे वो हाउस लोन करा रहे थे। जितेंद्र ने मनोहर को लालच दिया कि अस्पताल में ना केवल तुम्हारा अच्छे से इलाज होगा बल्कि तुम्हें बीस हजार रुपए भी मिलेंगे। बस इसके लिए तुम्हें 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ेगा। इसके लिए तुमको विधायक से लेटर लिखवा कर सीएम कार्यालय में जमा करना होगा। इस दलाल ने मनोहर को कोलार स्थित महावीर मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। यहां मात्र एक गोली देकर उनका पेट दर्द ठीक कर दिया गया, लेकिन सरकारी धन की आस में अस्पताल ने मनोहर को 15 दिन तक दिखावे के लिए अस्पताल में भर्ती रखा। आईवी फ्लूड्स लटकाकर और इंजेक्शन देते हुए फोटो भी ली गईं।

    अस्पताल ने जैसा कहा वो किया

    अस्पताल ने जैसा कहा वो किया

    दलाल के भर्ती कराकर जाने के बाद अस्पताल की तरफ से मनोहर से कहा गया कि आपको 15 दिन हॉस्पिटल में रहना होगा। इसके बाद हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने सीएम सहायता राशि के बारे में बताया। अस्पताल कर्मचारियों ने कहा कि विधायक रामेश्वर शर्मा के पास चले जाओ और उनसे एक लेटर लिखवा लो। इसके बाद लेटर सीएम कार्यालय में जमा कर देना। पीड़ित की पत्नी ने बताया कि उनके पति का जो बिल बनाया, उसमें राशि 1 लाख 73 हजार रुपये लिखी गई, लेकिन सीएम सहायता से उन्हें ₹30000 ही पास होकर अस्पताल के खाते में आए। अस्पताल ने तीस हजार में से केवल तीन हजार रुपए देने की बात कही, जब उन्होंने जितेंद्र का वादा याद दिलाया तो हॉस्पिटल वालों ने उन्हें पैसा देने से मना कर दिया और कहा कि तुम्हें जिससे शिकायत करना हो करो। पैसा नहीं मिलेगा।

    अस्पताल प्रबंधन और विधायक चुप

    अस्पताल प्रबंधन और विधायक चुप

    हमने इस फर्जीवाड़े पर जब हॉस्पिटल के मालिक से बात की, तो उन्होंने ऐसा कुछ भी होने से साफ मना कर दिया। जिन विधायक रामेश्वर शर्मा ने अनुशंसा पत्र लिखा, उन्होंने भी इस पर कुछ बोलने से इनकार कर दिया। दलाल ने पीड़ित परिवार को पहले खुद पैसे देने का वादा किया, बाद में वो भी मुकर गया। इतना ही नहीं दलाल ने पीड़ित परिवार से कहा कि अगर वह इस तरह से और भी लोग लाकर देंगे तो हर एक मरीज पर वह उन्हें ₹4000 देगा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ऐसा करने के लिए हॉस्पिटल के कर्मचारियों और दलाल ने उन पर दबाव बनाया। साथ ही उनकी आर्थिक परेशानियों का फायदा उठाकर बेबस किया गया।

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