MP News: Ladli Behna को मिली सौगात, CM मोहन यादव ने एक क्लिक में बांटी खुशियां, 1552 करोड़ पहुंचे खातों में
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए 16 अप्रैल 2025 का दिन उम्मीद, सम्मान और आर्थिक संबल का प्रतीक बन गया। मण्डला जिले के ग्राम टिकरवारा में एक भव्य और भावनात्मक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' की अप्रैल किस्त के रूप में प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं के खातों में 1552.38 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मंच से सिंगल क्लिक करते ही लाखों बहनों के खातों में 1250-1250 रुपये की राशि भेज दी, जिसे उन्होंने "आत्मनिर्भरता का बीज" बताया।

टिकरवारा में उमड़ा जनसैलाब, भावुक हुआ माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और कन्या पूजन से हुई, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक गरिमा का वातावरण बना। गांव की सड़कों पर बैंड-बाजे, स्वागत द्वार और रंगोली से माहौल उत्सव जैसा लग रहा था। हजारों की संख्या में महिलाएं रंग-बिरंगे परिधानों में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद तालियों की गूंज और चेहरे की मुस्कानें इस योजना की लोकप्रियता का प्रमाण बनीं।
Ladli Behna Yojana: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा,
"लाड़ली बहना योजना सिर्फ एक आर्थिक सहायता योजना नहीं, यह बहनों की गरिमा, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की आधारशिला है। हर बहन की आंखों में आत्मविश्वास की चमक देख रहा हूं। यही हमारे अभियान की सफलता है।"
योजना का सफर, सम्मान से आत्मनिर्भरता तक
इस योजना की शुरुआत मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी, जिसके तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को पहले 1000 रुपये और अब 1250 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। मार्च 2025 तक 22 किस्तें वितरित की जा चुकी थीं, और अप्रैल की 23वीं किस्त को लेकर कुछ दिनों की देरी पर राजनीति भी गरमा गई थी।
विपक्ष ने इस देरी को लेकर सरकार को घेरा, तो वहीं सरकार ने इसे तकनीकी कारणों और कैश फ्लो मैनेजमेंट से जुड़ा बताया। पर अब जब राशि ट्रांसफर हो गई है, विवादों पर विराम लग गया है।
Ladli Behna Yojana: 60 की उम्र के बाद रुकती है सहायता, लेकिन सवाल बाकी
हालांकि योजना की लोकप्रियता के बावजूद कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। जनवरी 2025 में करीब 1.63 लाख महिलाओं को सिर्फ इसलिए अपात्र करार दे दिया गया क्योंकि वे 60 साल की उम्र पार कर चुकी थीं और उन्हें पेंशन मिल रही थी।
कई महिलाएं, खासकर आदिवासी और दूरदराज की बस्तियों से, आधार-बैंक लिंकिंग और अन्य तकनीकी कारणों से अब तक राशि से वंचित हैं।
बहनों की ज़ुबानी: 'ये सिर्फ पैसे नहीं, सम्मान है'
स्थानीय महिला राधा बाई कहती हैं, "हमारे लिए ये 1250 रुपये बहुत बड़ी बात हैं। अब हम बच्चों की फीस भर सकते हैं, घर में दूध-दवा ला सकते हैं, और सबसे बड़ी बात - हमें मायके से उधार मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।"
वहीं संगीता कुशवाहा कहती हैं, "पहले जब घर में पैसों की बात आती थी तो हमें चुप रहना पड़ता था, अब हम भी निर्णयों में शामिल होते हैं। ये योजना हमें इज्जत देती है।"
लाड़ली बहना योजना से आगे: पक्के मकानों की ओर
योजना का दायरा अब केवल मासिक राशि तक सीमित नहीं है। 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई लाड़ली बहना आवास योजना के तहत सरकार पात्र बहनों को पक्के घर देने का भी वादा कर रही है। ग्राम पंचायतों में इस योजना के फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, और निर्माण कार्य शुरू होने की ओर बढ़ रहे हैं।
वित्तीय चुनौतियां: वादा 3000 का, इंतजार बरकरार
सीएम मोहन यादव ने फिर से मंच से वादा दोहराया कि "1250 की यह सहायता आगे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की जाएगी।" हालांकि, राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति इस वादे के रास्ते में रोड़ा बनी हुई है। 2024 में सरकार ने अगस्त, सितंबर और नवंबर महीने में कुल 15,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। विपक्ष इसे सरकार की "लोकलुभावन नीति की सच्चाई" बताता है।
आगे की राह: मदद से मिशन तक
महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता देना, उन्हें बैंक से जोड़ना, डिजिटल लेन-देन की आदत डालना, और घरेलू फैसलों में भागीदारी बढ़ाना - लाड़ली बहना योजना का यह असर सिर्फ एक योजना नहीं, एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत मानी जा रही है।
अब देखना यह है कि सरकार 3000 रुपये के अपने वादे को कब तक पूरा करती है और लाभार्थी महिलाओं को स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में और क्या-क्या कदम उठाए जाते हैं।












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