क्या रेडियो कॉलर से जा रही चीतों की जान? एक्सपर्ट के दावे को केंद्र ने किया खारिज, बताई मौत की वजह
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की घटती संख्या की वजह को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी बात है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने रेडियो कॉलर चीतों को लेकर भी स्थिति साफ की है।
Centre on Radio collar effect in Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत बड़ी चिंता का है। पार्क में चीतों की मौत को लेकर 'प्रोजेक्ट चीता' के मॉनीटरिंग और चीतों की देखभाल पर भी सवालिया निशान खड़े हुए। दरअसल, सरकार ने कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता के तहत 20 रेडियो कॉलर चीते (Radio Collar Cheetah) मंगाए थे। जिन्हें अन्य चीतों की मौत के लिए जिम्मेदार माना जा रहा था। ऐसे में रविवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। जिसमें कूनो नेशनल पार्क में जीतों की मौत की वजह और इसको लेकर सरकार की ओर से लिए जा रहे एक्शन की जानकारी दी गई।
मध्य प्रदेश में कूनो नेशनल पार्क में हो रही चीतों की मौत को लेकर केंद्र ने रविवार (16 जुलाई) को एक बयान जारी किया। जिसमें पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने कहा, "कूनो में स्थानांतरित किए गए 20 वयस्क चीतों में से पांच की मौत की सूचना मिली है। प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार सभी मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं।"

रेडियो कॉलर को मौत की वजह मानना जल्दबाजी: केंद्र
'प्रोजेक्ट चीता' के तहत, कुल 20 रेडियो-कॉलर वाले चीतों को नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुनो नेशनल पार्क में पहली बार आयात किए गए थे। लेकिन कुछ महीनों बाद ही चीतों की मौत हो गई थी। इनमें से अब तक कुल आठव चीतों की मौत हो चुकी है। ऐसे में केंद्र के प्रोजेक्ट चीता का इसकी वजह माना जा रहा था।लेकिन केंद्रीय मंत्रालय ने इसका बचाव करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट को अभी एक साल पूरा होना बाकी है। ये एक दीर्घकालिक योजना है। ऐसे में प्रोजेक्ट की सफलता या फिर विफलता के संदर्भ में परिणाम का निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगा।












Click it and Unblock the Notifications