MP News: आरएसएस कार्यालय में ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी, शिवाजी पर पुस्तक का विमोचन
MP News: केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली के केशव कुंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित पुस्तक "हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी" का विमोचन किया।
प्रो ओमप्रकाश सिंह और डॉ देवेंद्र भारद्वाज द्वारा संपादित इस पुस्तक को शिवाजी महाराज के जीवन, उनके संघर्ष और हिंदवी स्वराज के दर्शन को समर्पित एक महत्वपूर्ण कृति बताया जा रहा है। समारोह में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी, इतिहासकार, और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

शिवाजी महाराज, इतिहास निर्माता, अन्याय के खिलाफ योद्धा
सिंधिया ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज को एक ऐसी शख्सियत बताया, जिसने न केवल अपने समय में इतिहास रचा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा, "कुछ लोग इतिहास के पन्नों में उलझे रहते हैं, लेकिन शिवाजी महाराज जैसे लोग इतिहास बनाते हैं। 14 साल की उम्र में शिवाजी ने भगवान शिव के सामने प्रण लिया कि वह एक ऐसा स्वराज्य स्थापित करेंगे, जिसमें गरीब, मजदूर, किसान और हर वर्ग की भागीदारी हो।"
सिंधिया ने शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज के दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने आम लोगों और अन्नदाताओं की लड़ाई लड़ी। "शिवाजी महाराज ने आक्रमणकारी मुगलों को धूल चटाई और यह दिखाया कि स्वराज्य की नींव सामाजिक समावेश और न्याय पर रखी जा सकती है। यह पुस्तक उन झूठे नैरेटिव्स को तोड़ने का काम करेगी, जो शिवाजी महाराज के खिलाफ बनाए गए हैं।"
मोदी के 'पंच प्रण' और शिवाजी का हिंदवी स्वराज
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी जिस 'पंच प्रण' के माध्यम से भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, उसकी प्रेरणा शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज से मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के जरिए आज हम आतंकवाद को करारा जवाब दे रहे हैं। गोली का जवाब गोले से देना शिवाजी महाराज की उस विचारधारा को दर्शाता है, जिसमें अन्याय के खिलाफ साहस और शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है।"
सिंधिया ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जो शिवाजी महाराज के समावेशी और न्यायपूर्ण शासन के सिद्धांतों से मेल खाते हैं।

आरएसएस और शिवाजी महाराज की विचारधारा
सिंधिया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली को शिवाजी महाराज की विचारधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा, "आरएसएस ने अपने मूल सिद्धांतों में शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज के आदर्शों को आत्मसात किया है। संगठन का कार्य राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता के लिए है, जो शिवाजी महाराज के सपनों का प्रतिबिंब है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस का प्रत्येक स्वयंसेवक शिवाजी महाराज के साहस और समर्पण से प्रेरणा लेकर देश सेवा में जुटा है।
सिंधिया परिवार और शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक रिश्ता
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने परिवार के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि सिंधिया राजवंश का उदय छत्रपति शिवाजी महाराज के मावले के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा, "शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज का सपना अगर किसी ने साकार किया, तो वह सिंधिया राजवंश के महान योद्धा पाटिलबुवा महादजी शिंदे थे।" उन्होंने गर्व के साथ बताया कि सिंधिया परिवार ने हमेशा शिवाजी महाराज के आदर्शों को जीवंत रखा और उनके सिद्धांतों को अपने शासन और कार्यों में अपनाया।
पुस्तक का महत्व और उद्देश्य
"हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी" पुस्तक को प्रो. ओमप्रकाश सिंह और डॉ. देवेंद्र भारद्वाज ने गहन शोध के बाद संपादित किया है। यह पुस्तक शिवाजी महाराज के जीवन, उनके युद्ध कौशल, प्रशासनिक दक्षता, और सामाजिक न्याय के प्रति उनके दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत करती है। समारोह में उपस्थित विद्वानों ने इसे एक ऐसी कृति बताया, जो नई पीढ़ी को शिवाजी महाराज के योगदान से परिचित कराएगी और उनके खिलाफ फैलाए गए भ्रामक नैरेटिव्स को तोड़ेगी।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम में प्रो ओमप्रकाश सिंह ने कहा, "यह पुस्तक शिवाजी महाराज के जीवन को केवल एक योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शासक और समाज सुधारक के रूप में प्रस्तुत करती है।" डॉ. देवेंद्र भारद्वाज ने जोड़ा, "शिवाजी महाराज ने अपने समय में जो समावेशी शासन स्थापित किया, वह आज भी प्रासंगिक है। यह पुस्तक उस इतिहास को जीवंत करती है।"
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
इस पुस्तक विमोचन समारोह को न केवल एक साहित्यिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों को पुनर्जनन करने का एक प्रयास भी है। समारोह में उपस्थित आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता के लिए प्रेरित करेगी।
सिंधिया का संदेश: "शिवाजी का इतिहास प्रेरणा है"
सिंधिया ने अपने भाषण के अंत में कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन अन्याय के खिलाफ संघर्ष की गाथा है। उनकी नीतियां, उनका साहस, और उनका हिंदवी स्वराज का सपना आज भी हमें प्रेरित करता है। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि हमें अपने इतिहास से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है।"
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