सिंधिया बाराती घोड़े, सत्ता के आसपास नाचते हैं: जीतू पटवारी का तंज, बीजेपी विधायक बोले- ज्योतिरादित्य कोहिनूर
MP News Jyotiraditya Scindia: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तीखा हमला बोला और उन्हें "बाराती घोड़ा" करार देते हुए कहा कि वे सत्ता के आसपास नाचते हैं।
इस बयान पर बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने पलटवार करते हुए सिंधिया को "कोहिनूर हीरा" बताया और कांग्रेस पर तंज कसा कि वह उन्हें "कबाड़" समझती थी। यह सियासी वार-पलटवार राहुल गांधी के हालिया बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए "लंगड़े घोड़े, बाराती घोड़े और रेस के घोड़े" का जिक्र किया था।

राहुल गांधी के बयान से शुरू हुआ विवाद
3 जून 2025 को भोपाल के रवींद्र भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए तीन प्रकार के घोड़ों का उदाहरण दिया। उन्होंने "लंगड़े घोड़े" (जो काम नहीं कर सकते), "बाराती घोड़े" (जो सत्ता के लिए नाचते हैं), और "रेस के घोड़े" (जो मेहनत और लगन से काम करते हैं) की बात की। राहुल के इस बयान पर बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे "दिव्यांगों का अपमान" करार दिया।
पटवारी ने दी सफाई, सिंधिया पर साधा निशाना
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राहुल गांधी के बयान का संदर्भ समझाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मैंने दो दिन से सिंधिया जी का बयान देखा। वे विदेश में पढ़े हैं, लेकिन भारतीय मुहावरों को शायद नहीं समझते। राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया कि जो मेहनत और बहादुरी से लड़ेगा, पार्टी उसके साथ खड़ी रहेगी। लेकिन कुछ लोग सत्ता के लिए अपना रुख बदल लेते हैं। ऐसे लोग हर पार्टी में हैं, बीजेपी में भी। हमारे कई लोग सत्ता के लिए ही बीजेपी में गए।"
पटवारी ने आगे कहा, "सिंधिया जैसे लोग बाराती घोड़े हैं, जो सत्ता के आसपास नाचते हैं।" यह बयान 2020 में सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने और कमलनाथ सरकार के पतन की ओर इशारा करता है।
बीजेपी का पलटवार, "सिंधिया कोहिनूर हैं"
पटवारी के बयान पर बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "ज्योतिरादित्य सिंधिया कोहिनूर हीरे हैं। कांग्रेस ने उनकी कीमत नहीं समझी और उन्हें कबाड़ समझा। आज वे बीजेपी में केंद्रीय मंत्री हैं और ग्वालियर-चंबल अंचल के साथ पूरे मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।" लोधी ने पटवारी पर तंज कसते हुए कहा, "कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है।"
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, "कमलनाथ सरकार के पतन का दुख कांग्रेस से अब तक गया नहीं। इसलिए वे निराधार आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।"
सिंधिया और कांग्रेस का पुराना रिश्ता
ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे, जिसके बाद उनके समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफे से कमलनाथ सरकार गिर गई थी। तब से कांग्रेस लगातार सिंधिया पर हमलावर रही है। जीतू पटवारी ने पहले भी कई मौकों पर सिंधिया को निशाने पर लिया है। हाल ही में विजयपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद पटवारी ने एक बुजुर्ग की जमीन पर कब्जे से संबंधित सिंधिया के एक साल पुराने पत्र को उठाकर तंज कसा था कि "सिंधिया जी, जिंदा हो तो जिंदा नजर आओ।"
कांग्रेस में गुटबाजी का मुद्दा
पटवारी के बयान ने जहां बीजेपी को जवाब देने का मौका दिया, वहीं कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी भी एक बार फिर चर्चा में आ गई। जनवरी 2025 में पटवारी ने कांग्रेस में गुटबाजी को "कैंसर" की संज्ञा दी थी, जिसे बीजेपी ने तुरंत भुनाया। बीजेपी विधायक रविंद्र शिवाजी पटेल ने तब कहा था, "पटवारी ने कांग्रेस की बीमारी को पहचान लिया, लेकिन अब इसका इलाज संभव नहीं।"
सियासत में मुहावरों का दौर
राहुल गांधी का "घोड़ों" वाला बयान और पटवारी का "बाराती घोड़ा" तंज मध्य प्रदेश की सियासत में नया रंग ला रहा है। यह बयानबाजी न केवल सिंधिया और कांग्रेस के बीच पुरानी रंजिश को उजागर करती है, बल्कि बीजेपी के लिए भी अपने नेता का बचाव करने का अवसर बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी जंग और कितने नए मुहावरों को जन्म देती है।












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