Damoh प्राइवेट स्कूल यूनिफॉर्म से हटा हिजाब का बंधन, मॉर्निंग प्रेयर में No 'लव पे आती है दुआ..'
मध्य प्रदेश के दमोह के एक निजी स्कूल में हिजाब के मामले ने जमकर तूल पकड़ लिया हैं। हिन्दू संगठनों ने स्कूल प्रबंधन पर हिन्दू छात्राओं को जबरन हिजाब पहनने मजबूर करने का आरोप लगाया हैं।

Hijab removed from Damoh private school uniform: मध्य प्रदेश दमोह के एक निजी स्कूल में उठा हिजाब कांड जहां कई तरह की जांच के दायरे में हैं, तो वहीं सीएम शिवराज और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निर्देश के बाद कलेक्टर ने बड़ा एक्शन लिया हैं। यूनिफॉर्म से हिजाब का बंधन हटा दिया गया है।
दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने अब तक हुई जांच के आधार पर स्कूल को नोटिस जारी किया और स्टूडेंट यूनिफॉर्म से हिजाब की अनिवार्यता को मुक्त कर दिया। इसके अलावा स्कूल की प्रार्थना में अब अल्लामा इकबाल के 'लब पे आती है दुआ' सरीखे गीत भी नहीं गाए जाएंगे।
आपको बता दें जब दमोह के प्राइवेट स्कूल गंगा जामना हायर सेकेंडरी स्कूल के फ्लेक्स कटआउट पर कुछ छात्राओं की तस्वीरें लगी थी। परीक्षा परिणाम को प्रदर्शित करती छात्राएं हिजाब पहने नजर आई। इनमें कुछ टॉपर छात्राएं हिन्दू थी। जिसे देखकर हिन्दूवादी संगठन भड़क गए और जमकर बवाल मचा।
राजधानी भोपाल सीएम शिवराज तक जब यह मामला पहुंचा तो सरकार भी एक्शन में आई। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इस मामले में दमोह कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए थे। इससे पहले कलेक्टर ने ट्वीटर पर अपना बयान जारी किया था कि हिजाब की जबरदस्ती के आरोप निराधार हैं।
स्कूल प्रबंधन ने भी हिन्दूवादी संगठनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया था। इस मामले पर लगातार विरोध जता रहे हिंदूवादी संगठनों ने स्कूल की मान्यता रद्द करने की भी मांग है। गंगा जमुना हायर सेकेंडरी नाम के इस स्कूल और प्रबंधन से जुड़े लोगों की पूरी कुंडली भी खंगाली जा रही हैं।
इधर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानि एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी एक ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि-
'मध्यप्रदेश के दमोह जिले में एक स्कूल द्वारा हिंदू और अन्य गैर मुस्लिम बच्चियों को स्कूल यूनीफॉर्म के नाम पर जबरन बुर्का व हिजाब पहनाये जाने की शिकायत प्राप्त हुई है। इसका संज्ञान लिया जा रहा है। आवश्यक कार्यवाही हेतु जिलाधिकारी दमोह और पुलिस अधीक्षक दमोह को निर्देश प्रेषित किए जा रहे हैं। आगे लिखा, हिंदू और अन्य गैर मुस्लिम बच्चों को इस्लामिक प्रथाओं का अभ्यास करवाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन है। नोटिस भेज रहे हैं जिलाधिकारी को'।












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