MP News: बाढ़ पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया का एक्शन मोड, वर्चुअल बैठक में राहत कार्यों को लेकर दिए सख्त निर्देश
मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासकर गुना, अशोकनगर, और शिवपुरी जिलों में बाढ़ जैसे हालात ने प्रशासन और जनता के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस संकट की घड़ी में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री और गुना लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को इन तीनों जिलों के कलेक्टरों के साथ वर्चुअल बैठक कर स्थिति का गहन मूल्यांकन किया।
उन्होंने राहत और बचाव कार्यों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से हर प्रभावित व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। यह खबर सिंधिया के निर्देशों, राहत कार्यों की स्थिति, और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हालात को विस्तार से उजागर करती है।

वर्चुअल बैठक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 29 जुलाई 2025 की रात 10:30 बजे गुना, अशोकनगर, और शिवपुरी के जिला कलेक्टरों के साथ गूगल मीट के माध्यम से एक आपात बैठक की। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। अशोकनगर में 67 लोगों को रेस्क्यू किया गया, गुना के बमोरी में कलोरा डैम की वेस्ट वियर टूटने से गांवों में पानी भर गया, और शिवपुरी में सीएम राइज स्कूल में फंसे 20 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।
सिंधिया ने कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षा, भोजन, शुद्ध पेयजल, और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा, "राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नाव, हेलीकॉप्टर, और अन्य संसाधनों का तुरंत उपयोग करें।" उन्होंने सभी संबंधित विभागों-जैसे जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, और पुलिस-को समन्वय के साथ काम करने के लिए कहा ताकि कोई भी परिवार राहत से वंचित न रहे।
केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय
सिंधिया ने बताया कि वे केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के निरंतर संपर्क में हैं ताकि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), और सेना की सहायता उपलब्ध हो सके। इसके अलावा, वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ नियमित रूप से स्थिति की जानकारी साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी 23 जुलाई 2025 को एक समीक्षा बैठक में बाढ़ प्रबंधन के लिए पुख्ता सूचना तंत्र और राहत शिविरों की व्यवस्था पर जोर दिया था। उन्होंने सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को राहत कार्यों में शामिल करने का निर्देश दिया था, जो इस संकट में लागू हो रहा है।
राहत कार्यों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका
सिंधिया ने गुना, अशोकनगर, और शिवपुरी के विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों, और भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा, "मैं 24 घंटे स्थिति पर नजर रख रहा हूं और सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि वे प्रभावित लोगों के बीच मौजूद रहें और उनकी हर संभव मदद करें।" उन्होंने स्थानीय नेताओं से ग्राम स्तर पर राहत शिविरों की निगरानी और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
हालांकि, कुछ स्थानीय नेताओं की लापरवाही ने भी चर्चा बटोरी है। उदाहरण के लिए, शिवपुरी के कोलारस विधानसभा क्षेत्र में एक स्कूल बस को बाढ़ के पानी में उतारने की घटना ने सनसनी मचा दी, जिसमें 30 बच्चे खतरे में पड़ गए थे। ग्रामीणों ने त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को बचा लिया, लेकिन इस घटना में कथित तौर पर एक स्थानीय नेता के ड्राइवर की लापरवाही सामने आई। इस पर सिंधिया की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उन्होंने कलेक्टरों को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्ती बरतने को कहा।
राहत कार्यों की स्थिति: जमीनी हकीकत
अशोकनगर: जिले में भारी बारिश के कारण 67 लोगों को जलभराव से सुरक्षित निकाला गया। कलेक्टर ने बताया कि राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। सिंधिया ने अशोकनगर कलेक्टर को विशेष रूप से निचले इलाकों में नावों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
गुना: बमोरी के कलोरा डैम की वेस्ट वियर टूटने से उकावद गांव में पानी भर गया। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया है। सिंधिया ने डैम प्रबंधन और जल निकासी पर विशेष ध्यान देने को कहा।
शिवपुरी: सीएम राइज स्कूल में फंसे 20 बच्चों को SDRF ने रेस्क्यू किया। जिले में 7.76 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे कई सड़कें और पुल बंद हैं। सिंधिया ने कलेक्टर को बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों में मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए।
केंद्र सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP) के तहत 2021-26 के लिए 4,100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को बाढ़ नियंत्रण और कटाव-रोधी कार्यों के लिए 60% केंद्रीय सहायता मिलती है। इस फंड का उपयोग गुना और अशोकनगर में जल निकासी और तटबंधों की मरम्मत के लिए किया जा रहा है।
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