मिल ही गई मंत्री की कुर्सी... कौन हैं सियासत के माहिर खिलाड़ी रामनिवास रावत, जानिए पूरी कुंडली
Madhya Pradesh Cabinet expansion: मोहन कैबिनेट का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार हो गया है। कैबिनेट के दूसरे विस्तार में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले रामनिवास रावत को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें सोमवार की सुबह पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है।
कांग्रेस से नहीं दिया इस्तीफा
रामनिवास रावत ने कांग्रेस छोड़ दी है। लेकिन अभी तक विधायकी से इस्तीफा नहीं दिया है। कांग्रेस ने मांग की है कि ऐसे में उनपर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए। अब चर्चा की रामनिवास रावत जल्द ही विधायकी के पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद विजयपुर सीट पर भी उपचुनाव होगा।

कब हुए थे कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल
विजयपुर कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। वे दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं। रामनिवास रावत ने कांग्रेस छोड़ दी है, लेकिन अभी तक विधायकी के पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इसे लेकर कांग्रेस सवाल खड़े कर चुकी है।
कौन है रामनिवास रावत
रामनिवास रावत का जन्म 21 जनवरी 1960 को सुनवई गांव तहसील विजयपुर में हुआ था।रावत के पिता का नाम गणेश प्रसाद रावत और माता का नाम भंती बाई रावत है। रावत का व्यवसाय खेती किसानी है। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से बीएससी, एमए (इतिहास-गोल्ड मेडलिस्ट), एलएलबी तक शिक्षा ली है।

रामनिवास रावत का राजनीतिक कैरियर
रावत पहली बार 1988 में कृषि उपज मंडी समिति विजयपुर के अध्यक्ष बने। साल 1990 में मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए। इसके बाद हाल ही में उन्होंने साल 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते। 6 बार के विधायक रावत दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुके हैं।और वर्ष 2003 से भाजपा की सरकार रहने के बाद से वे विपक्ष में ही बैठे रहे थे। कमलनाथ सरकार आने के बाद भी उन्हें कोई पद नहीं दिया गया। यही कारण है कि उनकी नाराजगी दिनों-दिन बढ़ती गई।
ओबीसी के बड़े नेता
प्रदेश की राजनीति में अपना दबदबा बनाने वाले रामनिवास ओबीसी नेता के रूप में बड़ा चेहरा हैं और वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी नाराजगी का मुख्य कारण कांग्रेस आलाकमान द्वारा अनदेखी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ना बनाया जाना भी माना गया।












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