MP News: सहारा ग्रुप की जमीन खरीद मामले में EOW की जांच, बीजेपी विधायक संजय पाठक पर आरोप

Bhopal EOW News: सहारा ग्रुप द्वारा खरीदी गई जमीनों के मामले में अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने जांच शुरू कर दी है। कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक और उनकी कंपनियों पर आरोप हैं कि उन्होंने सहारा ग्रुप की 310 एकड़ जमीन को बहुत कम दामों पर खरीदा था।

इस मामले में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी विधायक संजय पाठक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, और दावा किया है कि यह एक बड़े वित्तीय घोटाले का हिस्सा हो सकता है।

EOW investigation in land purchase case of Sahara Group allegations against BJP MLA Sanjay Pathak

आरोप क्या हैं?

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने दावा किया कि संजय पाठक के स्वामित्व वाली कंपनियों ने भोपाल, जबलपुर और कटनी में स्थित सहारा ग्रुप की 310 एकड़ जमीन को बहुत कम दामों पर खरीदी थी। यादव का कहना है कि जिस समय इन जमीनों का बाजार मूल्य लगभग 1000 करोड़ रुपए था, उन जमीनों का सौदा संजय पाठक और उनकी कंपनियों ने मात्र करीब 90 करोड़ रुपए में कर लिया।

यह सौदा न केवल संदेहास्पद है, बल्कि इसमें गड़बड़ी की भी आशंका जताई जा रही है। डॉ. यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि कैसे और क्यों इन जमीनों का मूल्य इतनी कम दर पर तय किया गया, जबकि बाजार में इसकी कीमत कहीं अधिक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित वित्तीय घोटाला हो सकता है, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।

सहारा ग्रुप का कनेक्शन और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा कि सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग कॉर्पोरेशन इन्वेस्टमेंट ग्रुप ने कई शहरों में निवेशकों से धन जुटाकर "सहारा सिटी" बनाने के उद्देश्य से जमीनें खरीदी थीं। हालांकि, 2014 में सुप्रीम कोर्ट और SEBI ने सहारा समूह को निवेशकों की राशि लौटाने के लिए कंपनी की प्रॉपर्टी बेचने की अनुमति दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विशेष गाइडलाइन भी जारी की थी। इन गाइडलाइनों के अनुसार, प्रॉपर्टी बेचने से मिलने वाले पैसे को सीधे तौर पर सेबी-सहारा रिफंड खाता में जमा किया जाना था। कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि खरीदी गई जमीनों का अधिकतम 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्से को बाजार मूल्य से मेल खाता हुआ मूल्य पर बेचा जाएगा। यह आदेश इस बात को सुनिश्चित करने के लिए था कि निवेशकों के पैसे का सही तरीके से भुगतान किया जाए।

EOW की जांच और आगामी कार्रवाई

इस मामले में अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने जांच शुरू कर दी है। EOW को यह जांच करनी है कि क्या संजय पाठक और उनकी कंपनियों ने सहारा ग्रुप की जमीनें अवैध तरीके से बहुत कम कीमत पर खरीदीं, और क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की धोखाधड़ी की गई। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि क्या इस प्रक्रिया के तहत जमीनें बेचने के समय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया गया था या नहीं।

EOW द्वारा जांच की शुरुआत से यह साफ है कि यह मामला केवल एक संपत्ति सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय अनियमितताएं और धोखाधड़ी का भी खुलासा हो सकता है। ऐसे में यह मामला न केवल राजनीतिक बल्कि न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

बीजेपी विधायक संजय पाठक का बचाव

वहीं, बीजेपी विधायक संजय पाठक ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकारा किया है। उनका कहना है कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से हुईं और उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा खरीदी गई जमीनों के सौदे में कोई अनियमितता नहीं है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

पाठक का यह भी कहना है कि जमीनों की खरीददारी पूरी तरह से कानूनी तरीके से हुई थी, और यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह उचित माध्यम से इसकी शिकायत कर सकते हैं।

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