MP में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की सियासत में ढल रहा चुनावी साल, कथा पंडाल Vs कांग्रेस के पुजारियों की धर्म यात्रा!
अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के BJP के आरोपों से घिरे रहने वाली कांग्रेस, मध्य प्रदेश में ‘हिंदुत्व’ पर फोकस कर रही हैं। कमलनाथ ने पार्टी के पुजारी प्रकोष्ठ के जरिए बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है।

Election year turning into 'soft Hindutva' politics in MP: चुनावी साल में मध्य प्रदेश में 'हिंदुत्व' को लेकर सियासी दलों की अलग ढंग की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। 'सॉफ्ट हिंदुत्व' में ढलती सियासत में बीजेपी का मुकाबला करने कांग्रेस अपने पुजारी प्रकोष्ठ को आगे ला रही है। ताकि हिंदुओं के बीच उसकी छवि सुधर सकें।
धर्म, कर्म कांड का सूबे में अलग तरह का सियासी माहौल बन रहा हैं। कई मुरादों के साथ हर बेल्ट में सजे कथा पंडालों से अपार सफलता मिली। ये किसके खाते में गई, ये बात अलग है, लेकिन कांग्रेस का भी मन 'हिंदुत्व' की तरफ डोल रहा है।

सियासत की तासीर ही ऐसी होती है कि वक्त के हिसाब से उसमें ढल जाओं। वोट बैंक की राजनीति में सियासी दल शुरू से प्रयोगवादी रहे। धर्म, आस्था, हिंदुत्व विचारधारा जैसे शब्द और माहौल सत्ता में पहुंचने की सीढ़ी है, शायद मध्य प्रदेश में अब कांग्रेस भी समझने लगी है।

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धर्म-आस्था के नए ट्रेंड में बीते 6 महीने में एमपी में जिस तरह से कथा वाचकों का क्रेज बढ़ा। उसमें जरुरतमंदों ने पूरी ताकत झोंक दी। देवकीनंदन महाराज से लेकर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री और कुम्ब्केश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा से लेकर पंडोखर सरकार तक, आयोजनकर्ताओं में अधिकांश बड़े चेहरे भाजपाई रहे।

कथा प्रसंगों के बीच 'हिंदुत्व' का नारा बुलंद रहा। दिव्य दरबारों में सत्तारूढ़ बड़े सियासी चहेरों ने पहुंचकर बड़ा संदेश देने का भी काम किया। पंडाल में जुटी भीड़ भी, आयोजनकर्ताओं और उनके दल के नेताओं की कायल हो चली है।

कथा पंडालों की बढ़ती लोकप्रियता और वहां से निकल रहे बयानों से कांग्रेस को भविष्य के नफा-नुकसान का अहसास होने लगा है। इसी वजह से चुनावी तैयारियों में कांग्रेस भी इसी ट्रेंड में शामिल हो गई हैं। वह कथा के बजाय अपने पुजारी प्रकोष्ठ को सामने लाई है।

बीते दिनों राजधानी भोपाल में कमलनाथ ने अपने इस सेल के साथ 'धर्म संवाद' कर अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए हैं। 15 अप्रैल से प्रकोष्ठ में शामिल पुजारी राज्य के हर जिले में धर्म रक्षा यात्रा निकालेंगे, ऐसा कार्यक्रम तय कर दिया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि भाजपा आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती है। लेकिन पार्टी अपने नए कार्यक्रम के जरिए जनता का भ्रम दूर करना चाहती हैं। 'धर्म' कांग्रेस के विश्वास की आधारशिला है और प्रतिबद्ध है।

मिश्रा ने तय कार्यक्रम में यह भी कह दिया कि क्षेत्रवार संभावित प्रत्याशियों को 'धर्म रक्षा यात्रा' सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई। मतलब साफ़ है कि प्रकोष्ठ के पुजारी यानि ब्राह्मण वर्ग के जरिए पार्टी 'हिंदुत्व का अलग नारा बुलंद करेगी। ताकि उसके दामन पर लगने वाले तुष्टिकरण के दाग और आरोपों का जबाव दिया जा सकें।
हालांकि पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और सभी प्रकोष्ठों के प्रभारी जेपी धनोपिया ने इसे हिंदु वोट बैंक बढ़ाने की कवायद से साफ़ इंकार किया। उनका कहना हैं कि कांग्रेस ने कमलनाथ सरकार के वक्त पुजारियों के साथ कदमताल का वादा किया था, यह कार्यक्रम उसी का हिस्सा है।

पार्टी को न तो किसी कथा पंडाल से खतरा है और न ही वहां से निकल रहे संदेशों से। पुजारियों में ब्राह्मण समुदाय के अलावा गोसाई और वैष्णव समुदाय के पुजारी भी शामिल है। उनकी भी कई समस्याएं है, प्रकोष्ठ इसी लिए गठित हुआ, ताकि उनकी सुनवाई हो सकें।

सियासी मायनों में यह बात भी किसी ने नहीं छिपी कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक 'पुजारी' बड़ा पब्लिक इंटरफेस होते है। भाजपा के एकाधिकार में सेंध लगाने कांग्रेस की 'धर्म रक्षा यात्रा' की तैयारी है। यह कितनी सफल होगी, वक्हात ही बताएगा, हाल-फिलहाल भगवामाय सियासी मिजाज, कथा वाचक बनाम पुजारी प्रकोष्ठ हो चला हैं।












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