दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप, कमलनाथ सरकार में गोविंद सिंह राजपूत को विभाग सौंपने के लिए सिंधिया का था दबाव

MP News: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर भाजपा और पूर्व शिवराज सिंह चौहान व सिंधिया पर गंभीर आरोप लगाए है।

उन्होंने कहा कि जब कमलनाथ सरकार सत्ता में आई थी, तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन और राजस्व विभाग देने के लिए दबाव डाला। इसके बाद, कमलनाथ सरकार ने एक बोर्ड का गठन किया था, जो यह निर्णय करता था कि किन अधिकारियों की कहां पोस्टिंग होनी चाहिए।

Digvijay Singh There was pressure from Govind Singh Rajput Scindia in Kamal Nath government

बता दे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन और राजस्व विभाग देने के लिए दबाव बनाया था। हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये दबाव क्यों बनाया गया था, लेकिन इस बारे में वे मानते हैं कि केवल सिंधिया ही इसके कारणों के बारे में बता सकते हैं।

दिग्विजय सिंह का दावा

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने, तब सिंधिया जी ने दबाव डालकर उस बोर्ड को भंग करवा दिया और गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन विभाग फिर से सौंप दिया। इसके बाद से एक नई प्रक्रिया शुरू हो गई, जिसमें वसूली करने वाले व्यक्तियों की नियुक्ति की जाने लगी। दिग्विजय ने कहा, "ये वसूली वाले लोग नाकों पर नियुक्त किए गए थे।"

सौरभ शर्मा पर आरोप

दिग्विजय सिंह ने आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा टोल नाकों पर वसूली करता था और उसके साथ संजय श्रीवास्तव, वीरेश तुमरात, और दशरथ सिंह पटेल नाकों की नीलामी करके वसूली करते थे। दिग्विजय ने यह भी सवाल उठाया कि इनकी वसूली का पैसा कहां जाता था, और यदि इसकी जांच इनकम टैक्स अथॉरिटी करे, तो मनी ट्रेल का पता चल सकता है। उनका यह भी कहना था कि इस मनी ट्रेल के खुलासे के बाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए।

ईडी से सवाल

दिग्विजय सिंह ने इस मामले में इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) से सवाल पूछा कि क्या वे इस मामले पर संज्ञान नहीं लेंगे? उन्होंने आष्टा में सुसाइड करने वाले कारोबारी मनोज परमार का मामला उठाया, जिसमें ईडी ने छोटे कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन यहां करोड़ों रुपये की वसूली, सोना-चांदी और संपत्ति मिलने के बावजूद जांच की कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

भ्रष्टाचार के 20 साल

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री जी, आपने 20 सालों में कभी किसी नेता या अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में सजा दिलवाई है?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का आलम था और कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने कहा, "20 सालों में भाजपा सरकार के तहत भ्रष्टाचार इतना बढ़ा कि सरकारी विभागों में हर महीने राशि का घोटाला हो रहा था।" उन्होंने फूड सिविल सप्लाई विभाग और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं ने वेयरहाउस से माल निकालकर उसे बेच दिया था।

वेयरहाउस मैनेजर की आत्महत्या

दिग्विजय सिंह ने बताया कि वेयरहाउस मैनेजर शर्मा ने शिकायत की थी कि भाजपा के दो नेताओं ने वेयरहाउस से 1200 बोरी माल निकाल लिया था। जब अधिकारियों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, तो शर्मा ने आत्महत्या कर ली और अपने सुसाइड नोट में मनोज काला और राजेश परमार के नाम लिखे थे।

दिग्विजय सिंह का आरोप: 20 सालों तक भ्रष्टाचार का आलम रहा, शिवराज सरकार पर निशाना

भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" बयान पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या 20 सालों के शासन में किसी नेता या अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में सजा दिलवाई गई है? दिग्विजय ने कहा, "खूब खाओ, खूब खिलाओ और पकड़े जाओ, तो हम बैठे हैं," और आरोप लगाया कि यही कारण था कि शिवराज सरकार के 20 साल के शासन में भ्रष्टाचार का आलम रहा।

फूड सिविल सप्लाई विभाग और वेयरहाउसिंग घोटाला

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी रिसर्च जारी है, जिसमें फूड सिविल सप्लाई विभाग में हर महीने धनराशि के कथित घोटाले की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन आलोट में हुए घोटाले का जिक्र किया, जिसमें भाजपा के दो लोगों द्वारा वेयरहाउस से 1200 बोरी माल निकालने का आरोप है। दिग्विजय ने कहा, "वेयरहाउस में जो गेट लगता था, उसकी पट्टी काट दी जाती थी। इससे ताला तो लगा रहता था, लेकिन गेट खुल जाता था, और माल निकालने के बाद मिट्टी भरा माल डाल दिया जाता था।"

वेयरहाउस मैनेजर की आत्महत्या

दिग्विजय सिंह ने बताया कि वेयरहाउस मैनेजर शर्मा ने इस घोटाले की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। निराश होकर शर्मा ने आत्महत्या कर ली, और उसने अपने सुसाइड नोट में मनोज काला और राजेश परमार के नाम लिखे थे, जिन पर आरोप था कि वे दोनों ने वेयरहाउस से 1200 बोरी माल निकाल लिया था।

भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की मांग

दिग्विजय ने शिवराज सरकार से सवाल किया कि 20 साल के शासन में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके शासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

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