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Earthquake in Delhi: चंद्रग्रहण का भूकंप कनेक्शन, 24 घंटे में 6 बार जलजला, 2018 में भी आया था भूकंप

चंद्रग्रहण और भूकंप में क्या कोई सीधा कनेक्शन होता है? खग्रास पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान मंगलवार-बुधवार को 24 घंटे में अलग-अलग 6 जगहों पर भूकंप आया था। चंद्रमा पृथ्वी के काफी नजदीक आ जाता है, इस कारण धरती के गर्भ में उथल-पुथल हो जाती है। जनवरी 2018 में भी चंद्रग्रहण के दौरान दिल्ली एनसीआर में भूकंप आया था। वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री चंद्रग्रहण और भूकंप में किसी भी तरह के सीधे संबंध को नकारते रहे हैं, लेकिन भारतीय ज्योतिष हमेशा से चंद्रग्रहण और प्राकृतिक आपदाओं खासतौर से भूकंप, सुनामी और बाढ़ को लेकर भविष्यवाणी करता आया है। कई दफा यह सटीक और सच साबित भी हुई हैं।

चंद्रग्रहण के पहले और बाद में 6 जगह भूकंप आया

चंद्रग्रहण के पहले और बाद में 6 जगह भूकंप आया

नेपाल से लेकर दिल्ली एनसीआर तक तीव्र भूकंप के झटकों ने धरती के साथ लोगों को हिला कर रख दिया। बीते 24 घंटों में भारत व आसपास 6 अलग-अलग इलाकों में रिक्टर स्कैल पर भूकंप दर्ज किया गया है। मंगलवार को साल का आखरी और पूर्ण चंद्रग्रहण था, क्या भूकंप और चंद्रग्रहण में कोई सीधा संबंध होता है। वैज्ञानिक भले इस बात को नकारते हों, लेकिन ज्योतिष में इसको लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी। दरअसल चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के काफी नजदीक होता है। इसके प्रभाव के धरती के गर्भ में उथल-पुथल के चलते भूकंप और सुनामी व प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है।

चंद्रग्रहण के सूतक से लेकर ग्रहण समाप्त होने के बाद तक आया भूकंप

चंद्रग्रहण के सूतक से लेकर ग्रहण समाप्त होने के बाद तक आया भूकंप

नेशनल सेंटर फॉर सिस्‍मोलॉजी इंडिया की रिपोर्ट व रिव्यु के अनुसार बीते 24 से 36 घंटों में भारत व आसपास के इलाकों में 6 जगह भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। मंगलवार-बुधवार की रात 1.57 पर सबसे तेज 6.3 तीव्रता का भूकंप रिक्टर पर दर्ज किया गया हैं। जिसमें देश की राजधानी दिल्ली, एनसीआर व आसपास का इलाका कांप उठा था। इसके बाद रात करीब 3 बजकर 15 मिनट 22 सेकंड पर नेपाल में ही 3.6 रिक्टर स्कैल तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। इसके पहले मंगलवार को ही रात 9 बजकर 35 मिनट 41 सेकंड पर 3.5 तीव्रता का भूकंप जमीन के 5 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया था। इसके पूर्व करीब साढ़े 8 बजकर 52 मिनट 42 सेकंड पर 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इस लिहाज से अकेले नेपाल में ही एक दिन में चार दफा एक ही इलाके के आसपास भूकंप आया है।

म्यांमार, तिब्बत और मणिपुर इलाके में भी आया भूकंप

म्यांमार, तिब्बत और मणिपुर इलाके में भी आया भूकंप

भारतीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा अपनी अधिकृत बेवसाइट पर जारी की गई भूकंप की अपडेट जानकारी के अनुसार भारत व पड़ोसी इलाकों में मंगलवार सुबह सबसे पहला भूकंप का झटका चुराचांदपुर मणिपुर में आया था। यह रात करीब 1 बजकर दो मिनट पर 3.6 तीव्रता का था। इसका केंद्र जमीन के अंदर करीब 51 किलोमीटर नीचे था। इसके बाद दूसरा भूकंप का झटका तिब्बत के शिंजांग इलाके में सुबह 4.37 मिनट के आसपास महसूस किया गया। इसकी तीव्रता 4.5 और डेप्थ करीब 100 किलोमीटर बताई गई थी। इसके ठीक बाद सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर म्यांमार इलाके में 4.4 तीव्रता के भूकंप के झटके आए जिसका धरती के अंदर करीब 10 किलोमीटर नीचे केंद्र था।

जनवरी 2018 में भी चंद्रग्रहण के पहले दिल्ली में आया था भूकंप

जनवरी 2018 में भी चंद्रग्रहण के पहले दिल्ली में आया था भूकंप

भूकंप और चंद्रग्रहण के आंकड़ों पर नजर डाले तो पता चलता है कि 31 जनवरी को खग्रास पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ा था। ग्रहण लगने के कुछ घंटों पहले दोपहर में दिल्ली एनसीआर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। जिसकी तीव्रता 6.1 रिक्टर स्कैल पर बताई गई थी। बता दें कि ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ होने के कुछ समय बाद ही पड़ोसी देश अफगानिस्तान के हिन्दूकश इलाके में इंडिया के समयानुसार दोपहर करीब 12.37 बजे भूकंप आया था, जिसका असर उस समय दिल्ली एनसीआर के साथ-साथ राजस्थान के सीकर, झुंझुनंू और चुरु में भी रहा था।

ग्रहण के दौरान धरती के नजदीक होता है चंद्रमा, बढ़ जाता है गुरुत्वाकर्षण

ग्रहण के दौरान धरती के नजदीक होता है चंद्रमा, बढ़ जाता है गुरुत्वाकर्षण

वैज्ञानिकों का मत है कि पृथ्वी के अंदर टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने भूकंप पैदा होता है। यह भूगर्भीय स्थिति और दबाव से निर्मित होता है। इसके परिणाम स्वरुप भूकंप आताा है। यदि यही टेक्नोटिस प्लेंटे समुद्र के अंदर टकराएं तो सुनामी आती है। इधर ज्योषित के जानकार पंडिय यशोवर्धन चौबे बताते हैं कि जब खग्रास पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तो सूर्य, धरती और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। इस दौरान चंद्रमा धरती के काफी करीब होता हैं। चंद्रमा का सीधा संबंध जल तत्व से होता है। गुरुत्वार्षण शक्ति बढ़ जाती है और धरती के अंदर उथल-पुथल शुरु हो जाती हैं, परिणामस्वरुप भूकंप जैसी स्थिति निर्मित होती है। हालंाकि सांइस इससे इत्तेफाक नहीं रखता है।

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