Delhi Elections Results 2025: महिला उम्मीदवारों पर सबकी नजरें, आतिशी, अलका, अरीबा सहित इन 5 नामों पर चर्चा
Delhi Elections Results 2025: दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस बार 699 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनमें से 96 महिलाएं हैं। इन महिला उम्मीदवारों में कुछ ऐसी हैं जिनके चुनाव परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दिल्ली की राजनीति में महिला उम्मीदवारों का योगदान पहले भी अहम रहा है, और इस बार भी इन उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। आइए जानते हैं उन प्रमुख महिला उम्मीदवारों के बारे में, जिनके बारे में चुनावी विश्लेषक, राजनीतिक पर्यवेक्षक और जनता सभी चर्चा कर रहे हैं।

आतिशी का संघर्ष: कालकाजी सीट पर आसान नहीं है रास्ता
आतिशी, जो वर्तमान में दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं, इस बार कालकाजी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनकी पहचान दिल्ली के शिक्षा मॉडल को लेकर बनाई गई है, और उन्हें आम आदमी पार्टी (आप) के शिक्षा मॉडल का श्रेय दिया जाता है। आतिशी ने अपनी राजनीति की शुरुआत दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र को सुधारने से की थी, और इस क्षेत्र में किए गए बदलावों के चलते उन्हें जनता में एक सकारात्मक पहचान मिली है।
हालांकि, कालकाजी सीट पर उनका मुकाबला कोई आसान नहीं होगा। उनके खिलाफ कांग्रेस की दिग्गज नेता अलका लांबा मैदान में हैं। अलका लांबा पहले आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई थीं, लेकिन 2019 में कांग्रेस से जुड़ीं। इस सीट पर अलका की उपस्थिति ने इसे दिल्ली की सबसे चर्चित सीटों में से एक बना दिया है।
आतिशी और अलका लांबा दोनों के बीच मुकाबला एक तरफ राजनीतिक अनुभव और दूसरी तरफ युवा नेता की रणनीति का होगा। दोनों के पास अपनी-अपनी पार्टी का समर्थन है, और इन दोनों की चुनावी जंग में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे जीतने का मौका देती है।
अलका लांबा की वापसी: एक अनुभवशील नेता का संघर्ष
अलका लांबा का नाम दिल्ली की राजनीति में एक प्रमुख नाम है। वे पिछले 30 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं और कांग्रेस पार्टी की एक सशक्त नेता मानी जाती हैं। हालांकि, उन्होंने 2014 में कांग्रेस से नाता तोड़ा था, लेकिन 2019 में वे फिर से पार्टी से जुड़ीं। अलका लांबा की राजनीति में वापसी और कालकाजी सीट से उनका चुनावी मैदान में आना दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। वे आतिशी के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं, और उनकी कोशिश होगी कि वे अपनी पार्टी की धारा को मजबूत करें।
अलका लांबा का राजनीतिक अनुभव, उनका कार्यकाल और उनकी जनता से जुड़ी नीतियां उनके लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में काम कर सकती हैं। इस बार उन्हें चुनौती देने के लिए कई मुद्दों पर जनता का समर्थन जुटाना पड़ेगा, लेकिन एक अनुभवशील नेता के रूप में वे इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
शिखा राय का संघर्ष: ग्रेटर कैलाश में सौरभ के खिलाफ
शिखा राय, जो पेशे से वकील हैं, इस बार दिल्ली के ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं। बीजेपी ने उन्हें आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ उम्मीदवार बनाया है। शिखा राय 2020 के विधानसभा चुनाव में भी सौरभ भारद्वाज के खिलाफ लड़ी थीं, लेकिन उन्हें 17,000 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
इस बार शिखा राय के सामने चुनौती ये होगी कि वे सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मजबूत अभियान चला सकें। सौरभ की छवि दिल्ली में एक कड़े नेता के रूप में बन चुकी है, और इस सीट पर बीजेपी के लिए मुकाबला काफी मुश्किल हो सकता है। हालांकि, शिखा राय की राजनीतिक मेहनत और उनकी पार्टी की रणनीति उन्हें फिर से इस सीट पर चुनौती देने का मौका दे सकती है।
अरीबा खान का चैलेंज: ओखला सीट पर आम आदमी पार्टी को चुनौती
अरीबा खान, जो कांग्रेस की युवा नेता हैं, ओखला विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। ओखला सीट पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान पहले से ही काबिज हैं, और इस बार अरीबा खान उन्हें चुनौती दे रही हैं। अरीबा के पिता आसिफ खान ओखला से दो बार विधायक रहे हैं, और इस क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव मजबूत है।
अरीबा खान की कोशिश होगी कि वे ओखला की जनता का समर्थन प्राप्त कर सकें, जो पारिवारिक राजनीति से जुड़ी हुई रही है। अरीबा के पास अपने पिता की राजनीतिक विरासत का फायदा हो सकता है, लेकिन उन्हें यह साबित करना होगा कि वे इस क्षेत्र में बदलाव ला सकती हैं। आम आदमी पार्टी के लिए यह सीट अहम है, और अमानतुल्लाह खान की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
रागिनी नायक: वजीरपुर सीट पर कांग्रेस की उम्मीद
रागिनी नायक इस बार दिल्ली के वजीरपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस के लिए वजीरपुर सीट पर जीत हासिल करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है, क्योंकि इस सीट पर उनके मुकाबले में आम आदमी पार्टी (आप) के राजेश गुप्ता और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूनम शर्मा हैं। रागिनी नायक के पास पार्टी की सशक्त प्रतिनिधि के रूप में अपना दावा पेश करने का पूरा मौका है, और इस बार उनका लक्ष्य वजीरपुर में कांग्रेस की हार के सिलसिले को तोड़ना है।
रागिनी नायक 42 वर्ष की हैं और उन्होंने राजनीति में एक मजबूत पैठ बनाई है। वे पहले ही कई टीवी बहसों में कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रख चुकी हैं, और पार्टी के प्रति उनका समर्पण हमेशा देखा गया है। कांग्रेस के लिए वजीरपुर सीट पर उनकी उम्मीदवारी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि वे एक पहचान बनाए हुए नाम हैं जो पार्टी की विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करती आई हैं।
वह कांग्रेस की एक जाना-पहचाना चेहरा हैं और पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में उनका अहम योगदान रहा है। उनका मुकाबला इस बार राजेश गुप्ता (आप) और पूनम शर्मा (बीजेपी) से है, जो दोनों ही अपने-अपने दलों के मजबूत उम्मीदवार माने जाते हैं।












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