Damoh News: न दलील, न वकील गांव की चौपाल में पुलिस ने सुलझाई पानी की समस्या
दमोह की शिवपुरा ग्राम पंचायत के शिवपुर गांव में दबंगों ने एक दशक से जलस्रोत पर कब्जा जमा रखा था। ग्रामीण जब पुलिस में एफआईआर कराने पहुंचे तो पुलिस ने गांव में चौपाल लगाकर महज एक घंटे में यह समस्या निपटा दी।

मामला मड़ियादो थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवपुर के रमपुरा गांव में सामने आया था। जहां सरकारी सार्वजनिक जलस्रोत पर दबंग ने कब्जा कर लिया था। बात मड़ियादो थाना तक पहुंची तो पुलिस ने सोशल पुलिसिंग का इस्तेमाल करते हुए गांव में चबूतरे पर चौपाल लगाई दोनों पक्षों को बिठाया और निराकरण कर दिया गया। जिससे न दलील और न ही वकील की जरूरत पड़ी।
रमपुरा गांव में एक बोरवेल का खनन 2005 में कराया गया था। जिस पर कुछ सालों बाद गांव के दबंग ने अपना एकाधिकार कर लिया और गांव के किसी भी व्यक्ति को पानी नहीं भरने दे रहा था। मार्च माह शुरू होते ही गांव में पानी की समस्या गहरा गई है। एक हैंडपंप लगा है। जिसने पानी देना बंद कर दिया था। अब ग्रामीण इस प्रयास में थे कि दबंग द्वारा कब्जा किया गया जलस्रोत मुक्त होकर सार्वजनिक हो जाए जिससे लोगों को पानी के लिए दूर-दूर नहीं भटकना पड़ेगा। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि बोर में सार्वजनिक मोटर पंप रख दिया जाए तो लोगों के लिए लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। बताया जा रहा है कि जिस दबंग द्वारा कब्जा किया था। उसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। जिससे ग्रामीणों की शिकायत जहां भी जाती दबकर रह जाती थी।

पानी के लिए पुलिस थाने में शिकायत कराई दर्ज
ग्रामीणों ने मड़ियादो थाना प्रभारी बृजेश पांडेय के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को उन्होंने गंभीरता से लेते हुए कहा कि वह स्वयं गांव आएंगे। शुक्रवार को थाना प्रभारी रमपुरा गांव पहुंचे थे। जहां उन्होंने शिकायतकर्ता ग्रामीणों व बोरवेल पर कब्जा किए दबंग को बुलाया। गांव में ही चबूतरे पर पेड़ के नीचे चौपाल बैठी। जिसमें उन्होंने सोशल पुलिसिंग का इस्तेमाल करते हुए दबंग को समझाइश दी। सार्वजनिक जल स्रोत पर अतिक्र्रमण करने पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है इसका भी अहसास कराया। जिसके बाद दबंग ने सहमति दे दी कि अब सार्वजनिक बोर सभी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। पुलिस ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद कई सालों से चली आ रही ग्रामीणों की समस्या को हल करा दिया।
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कोर्ट, कचहरी तक जा रहे थे ग्रामीण
ग्रामीण ने पुलिस में शिकायत इसलिए दर्ज कराई थी कि थाने में एफआइआर दर्ज कराए जाने के बाद मामला कोर्ट, कचहरी तक जाएगा तो वह वहां तक लड़ने की तैयारी कर चुके थे। जहां वकीलों के माध्यमों से ग्रामीण की दलीलें रखी जाती बचाव पक्ष अपनी दलील पेश करता। लेकिन मड़ियादो थाना प्रभारी बृजेश पांडेय ने ग्रामीणों को लंबी प्रक्रिया से न्याय दिलवाने के बजाए शार्टकट आपसी समझाइश में चौपाल में ही समस्या का निराकरण करा दिया। जिससे रमपुरा गांव के ग्रामीण खुश नजर आ रहे हैं।
बुंदेलखंड में चौपाल व्यवस्था सदियों पुरानी
पेड़ के नीचे चबूतरा पर फैसला करने वाले लोग बैठते हैं और चबूतरे के नीचे जिनके बीच विवाद होता है वह दो पक्ष बैठते हैं। यह व्यवस्था ग्राम्य जीवन की सदियों पुरानी है। जिस पर मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कहानी में भी उतारा था। बुन्देलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल आज भी प्रचलित है। जहां छोटे-मोटे झगड़े सुलझा लिए जाते हैं, लेकिन जब से ग्राम पंचायतों की राजनीति शुरू हुई है तब से इन चौपाल का चलन कम हो गया है। अब गांव में सरपंच के पक्ष और विपक्ष की गुटबंदी शुरू हो जाने से चौपाल पर होने वाले विवाद न्यायालय में प्रकरणों की संख्या बढ़ा रहे हैं। जिस तरह पुलिस ने चौपाल के माध्यम से सोशल पुलिसिंग का उदाहरण प्रस्तुत किया है।












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