कूनो नेशनल पर खड़ा हुआ नया विवाद, जमीन देने वाले पालपुर रियासत परिवार के सदस्य ने मांगी जमीन
कूनो नेशनल पार्क को लेकर सामने आया विवाद, पालपुर की पूर्व रियासत के वंशज ने मांगी 220 बीघा जमीन
श्योपुर, 22 सितम्बर। कूनो नेशनल पार्क को लेकर विवाद सामने आया है। कूनो नेशनल पार्क के लिए जमीन देने वाले पालपुर की पूर्व रियासत के सदस्य ने न केवल जमीन मांगी है बल्कि सरकार पर अनदेखी का आरोप भी लगाया है। इतना ही नहीं पूर्व रियासत के सदस्य गोपाल देव सिंह ने यह भी कहा है कि पालपुर रियासत के राजा जगमोहन सिंह ने इस सिंह परियोजना के लिए अभ्यारण की नींव रखी थी। जमीन बब्बर शेर के लिए दी गई थी लेकिन इस जमीन पर चीते लाए गए हैं।

पालपुर रियासत की 220 बीघा जमीन की गई थी अधिग्रहित
पालपुर की पूर्व रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि पालपुर की पूर्व रियासत द्वारा अपनी 220 बीघा जमीन बब्बर शेरों के लिए दी थी लेकिन इस जमीन पर बब्बर शेर लाने की बजाय यहां पर चीते लाए गए हैं। इसके साथ ही गोपाल देव सिंह का कहना है कि 220 बीघा जमीन के बदले उन्हें सिर्फ 27 बीघा असिंचित और उबड़ खाबड़ जमीन दी गई जिस पर खेती करना भी संभव नहीं है।

पालपुर में स्थित किला समेत अन्य पुश्तैनी संपत्ति छोड़ी थी
पालपुर की पूर्व रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह का कहना है जब उनकी रियासत की जमीन अधिग्रहित किया गया था तो उन्हें उस जमीन पर बने किले, मंदिर और कुएं बावड़ी को छोड़ना पड़ा था लेकिन इसके बदले में उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला। जितनी जमीन अधिग्रहित की गई, उतनी जमीन भी नहीं दी गई। खास बात यह रही कि उनके मंदिर में मौजूद देवी देवताओं की पूजा करने के लिए भी उन्हें वन विभाग की तरफ से अनुमति नहीं दी जाती है।

हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
पालपुर रियासत के वंशजों द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ साल 2010 में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने इसे सही माना लेकिन इस मामले को सेशन कोर्ट में ले जाने की बात की। जिसके बाद यह मामला विजयपुर कोर्ट में विचाराधीन।

अधिग्रहित जमीन के बदले में चाहिए जमीन
पालपुर रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह का कहना है कि उनकी पालपुर रियासत की 220 बीघा जमीन को सिंह अभ्यारण्य के लिए अधिकृत किया गया था। उसके बदले उन्हें जमीन भी नहीं दी गई है इसलिए उन्हें या तो 220 बीघा जमीन दी जाए या उनकी अधिग्रहित की गई जमीन को फिर से उन्हें वापस लौटाया जाए। इसके साथ गोपाल सिंह देव का कहना है कि चीतों के कूनो नेशनल पार्क में छोड़े जाने को लेकर इतना बड़ा आयोजन किया गया लेकिन उन्हें इस आयोजन में नहीं बुलाया गया।












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