कांग्रेस कैसे हारी अमरवाड़ा उपचुनाव, जीतू पटवारी की अध्यक्षता में यह दूसरी हार, जानिए भाजपा की जीत के समीकरण
Amarwara By Election Results: मध्य प्रदेश में लोकसभा चावन के नतीजे के बाद पहली बार उपचुनाव हुआ, जिसमें भाजपा को जीत मिली है। छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी कमलेश शाह ने करीब 3252 वोटों से जीत दर्ज की है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि कांग्रेस अपने ही गढ़ में कैसे चुनाव हार गई। जबकि सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा था।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 29 मार्च 2024 को भाजपा ने रणनीति के तहत कमलेश शाह को बीजेपी में शामिल करवाया। इसके बाद कमलेश आने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। कमलेश शाह के भाजपा में शामिल होने से लोकसभा चुनाव में पार्टी को उसका फायदा मिला और 41 साल बाद वो छिंदवाड़ा सीट जीतने में कामयाब रही।

कांग्रेस द्वारा आदिवासी कार्ड खेलने के बावजूद मिली हार
उपचुनाव की घोषणा होते ही भाजपा ने जहां कमलेश शाह को प्रत्याशी घोषित कर दिया वहीं कांग्रेस को अपना उम्मीदवार चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कांग्रेस ने आदिवासी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए आंचल कुंड दरबार से जुड़े धीरन शा इनवाती को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद भाजपा ने इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यही वजह है कि कांग्रेस को हर का सामना करना पड़ा।
राजनीति विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार सरवन नगली की माने तो बीजेपी सीट पर मुश्किल में थी लेकिन सत्ता और संगठन के लिए अमरवाड़ा चुनाव पर जीत प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। आज चुनाव परिणाम में 17वें राउंड तक कांग्रेस लीड ने बनाकर रखी थी। लेकिन जैसे ही ग्रामीण क्षेत्र की ईवीएम मशीने खुली उसमें बीजेपी को शानदार बढ़त मिल गई।

जानिए भाजपा की जीत के पांच बड़े कारण
- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा लगातार छिंदवाड़ा में बैठक कार्यकर्ताओं में जोश भरना। साथ ही कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस में आए रावत को मंत्री बनाकर यह मैसेज देना कि कमलेश शाह जीते तो वह भी मंत्री बनेंगे।
- दूसरा सबसे बड़ा पहलू यह है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अमरवाड़ा की जनता को भरोसा दिलाया कि अगर कमलेश शाह जीत गए तो उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
- जहां कांग्रेस बिक्री हुई नजर आ रही थी वहां भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को बराबर जोड़ रखा। कमलेश शाह को उम्मीदवार बनाने के बाद पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मोनिका भाटी को समझने में भाजपा कामयाब रही और उन्हें कांग्रेस में जाने नहीं दिया गया।
- इसके अलावा कांग्रेस में रणनीति के तहत आदिवासियों की पार्टी इसके अलावा कांग्रेस में रणनीति के तहत आदिवासियों की पार्टी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पर ज्यादा हमला नहीं किया ताकि वह कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सके।
- कांग्रेस उम्मीदवार आंचल कुंड दरबार से जुड़े होने के कारण खास चर्चाओं में रहे, लेकिन बीजेपी उम्मीदवार कमलेश शाह चुनाव के बीच में आंचलकुंड दरबार में आशीर्वाद लेने पहुंचे और एक मैसेज दिया कि वह धाम के खिलाफ नहीं है।
जीतू पटवारी की अध्यक्षता में यह दूसरी हार
विधानसभा चुनाव 2023 में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस हाई कमान में परिवर्तन करते हुए कमलनाथ को हटाकर कांग्रेस नेतृत्व ने पूर्व मंत्री जीतू पटवारी को जिम्मेदारी सौंपी थी। जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बने हुए करीब 6 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन लोकसभा चुनाव में हार के बाद अब उपचुनाव में भी पटवारी की अध्यक्षता में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि मुकाबला कांटे का रहा। भाजपा को सत्ता होने का फायदा भी मिला है।












Click it and Unblock the Notifications