MP News: भाजपा के 500 से अधिक कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, कमलनाथ ने बताया क्यों छोड़ा BJP का साथ
Chhindwara News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 1 अगस्त 2025 को राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब गोंडवाना समाज सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 500 से अधिक कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री और छिंदवाड़ा के दिग्गज नेता कमलनाथ और उनके बेटे, पूर्व सांसद नकुलनाथ के नेतृत्व में आयोजित एक कार्यक्रम में इन कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया।
कमलनाथ ने इस अवसर पर कहा कि ये कार्यकर्ता कांग्रेस की नीतियों और इंदिरा गांधी व राजीव गांधी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए हैं। यह घटना छिंदवाड़ा में कांग्रेस की स्थिति को और मजबूत करने का संकेत देती है, जो लंबे समय से कमलनाथ का गढ़ रहा है।

कांग्रेस में शामिल होने की पृष्ठभूमि
छिंदवाड़ा, जो दक्षिण मध्य प्रदेश में कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता है, पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की ओर से तीव्र राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा ने छिंदवाड़ा में कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश की थी। छिंदवाड़ा के कई कांग्रेसी नेता, जिनमें अमरवाड़ा के विधायक कमलेश शाह, पूर्व विधायक दीपक सक्सेना, और महापौर विक्रम अहाके शामिल थे, ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इस दौरान भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने दावा किया था कि एक महीने में 3000 से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए।
कमलनाथ का बयान: "कांग्रेस जोड़ती है, भाजपा तोड़ती है"
कमलनाथ ने कार्यकर्ताओं के स्वागत समारोह में कहा, "कांग्रेस पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा और हर्रई के गोंडवाना समाज सहित भाजपा के 500 से अधिक कार्यकर्ता आज कांग्रेस में शामिल हुए। मैंने उन्हें स्पष्ट बताया कि आप इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाली कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस समाज को जोड़ती है, वहीं भाजपा समाज को तोड़ती है। हम सब मिलकर मजबूत छिंदवाड़ा और मजबूत मध्य प्रदेश का निर्माण करेंगे।"
कमलनाथ का यह बयान न केवल कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का प्रयास था, बल्कि भाजपा पर सामाजिक विभाजन का आरोप लगाकर सियासी हमला भी था। कमलनाथ ने अपने बयान में छिंदवाड़ा को अपना "परिवार" करार देते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा स्थानीय लोगों की सेवा रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे ने भी कहा, "कमलनाथ का छिंदवाड़ा से राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ता है। वह यहां की जनता को अपना परिवार मानते हैं।"
क्यों बदला कार्यकर्ताओं का मन?
कमलनाथ की व्यक्तिगत पकड़: छिंदवाड़ा में कमलनाथ का प्रभाव ऐतिहासिक रहा है। स्थानीय लोग कमलनाथ की कसम खाते हैं और उन्हें विकास पुरुष मानते हैं। उनकी सक्रियता, जैसे हर महीने कम से कम तीन दिन छिंदवाड़ा में बिताना और ग्रामीण क्षेत्रों में दौरा करना, कार्यकर्ताओं को आकर्षित करता है।
कांग्रेस की सामाजिक नीतियां: कमलनाथ ने अपने बयान में इंदिरा और राजीव गांधी के सिद्धांतों पर जोर दिया, जो सामाजिक समावेश और एकता पर आधारित हैं। गोंडवाना समाज, जो आदिवासी समुदाय का हिस्सा है, ने शायद कांग्रेस की इन नीतियों में अधिक विश्वास जताया। कमलनाथ और नकुलनाथ नियमित रूप से आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
भाजपा में असंतोष: कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि भाजपा में उन्हें उचित सम्मान या अवसर नहीं मिल रहे। 18 फरवरी 2024 को दीपक सक्सेना के हवाले से कहा था कि छिंदवाड़ा का विकास रुका हुआ है और लोग चाहते हैं कि कमलनाथ भाजपा में शामिल हों। हालांकि, कमलनाथ ने इसे खारिज कर दिया और अब उलट प्रवाह देखने को मिल रहा है।

लोकसभा और विधानसभा में कांग्रेस की जीत: 2023 के विधानसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर कांग्रेस की जीत और 2019 में नकुलनाथ की लोकसभा जीत ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है। @news18hindi ने नकुलनाथ के हवाले से कहा, "कमलनाथ छिंदवाड़ा के लोगों के दिल में हैं और हमेशा रहेंगे।"
सियासी निहितार्थ
यह घटना छिंदवाड़ा में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने का संकेत देती है, खासकर तब जब 2024 में भाजपा ने इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह के रोड शो और मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे के साथ छिंदवाड़ा पर फोकस किया था। फिर भी, कमलनाथ की रणनीति, जैसे विक्रम अहाके की कांग्रेस में वापसी, ने भाजपा को चक्रव्यूह में फंसाया।
इस बार कार्यकर्ताओं का पलायन भाजपा के लिए झटका माना जा रहा है। भाजपा ने छिंदवाड़ा में कमलनाथ को हराने के लिए दिल्ली और गुजरात से टीमें बुलाई थीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब 500 से अधिक कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में जाना भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाता है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय सक्सेना ने कहा, "कमलनाथ की छिंदवाड़ा में गहरी पैठ है। उनकी रणनीति और स्थानीय लोगों से भावनात्मक जुड़ाव भाजपा के लिए चुनौती है। यह पलायन दर्शाता है कि कार्यकर्ता व्यक्तिगत नेतृत्व को नीतियों से ज्यादा महत्व दे रहे हैं।" सामाजिक कार्यकर्ता अनीता बागरी ने कहा, "गोंडवाना समाज का कांग्रेस की ओर झुकाव आदिवासी समुदायों के लिए पार्टी की समावेशी नीतियों का परिणाम है।"
इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं:
- भाजपा की रणनीति: क्या भाजपा छिंदवाड़ा में अपनी खोई जमीन वापस पा सकेगी?
- कमलनाथ की रणनीति: क्या यह पलायन 2028 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को और मजबूत करेगा?
- स्थानीय विकास: कार्यकर्ताओं का कहना है कि छिंदवाड़ा का विकास रुका हुआ है। क्या कांग्रेस इसे भुना पाएगी?
कमलनाथ ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा सरकार छिंदवाड़ा की उपेक्षा जारी रखेगी, तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर और बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।












Click it and Unblock the Notifications