MP News: विधायक चिंतामणि मालवीय को भाजपा का शो-कॉज नोटिस, उज्जैन सिंहस्थ जमीन अधिग्रहण पर बयान बना मुसीबत

MP News: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। रतलाम जिले के आलोट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय को पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विधानसभा के हालिया बजट सत्र के दौरान उनके उस बयान को लेकर दिया गया है, जिसमें उन्होंने उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए जमीनों के स्थायी अधिग्रहण को लेकर अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया था।

मालवीय के इस बयान ने न सिर्फ सरकार को बैकफुट पर ला दिया, बल्कि पार्टी की अंदरूनी कलह को भी सतह पर ला दिया। अब इस मामले की गूँज केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच गई है, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सख्त कदम उठाते हुए मालवीय को नोटिस थमा दिया है।

BJP issues show-cause notice to MLA Chintamani Malviya over Ujjain Simhastha land acquisition

विधानसभा में शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चिंतामणि मालवीय ने उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। मालवीय ने अपने भाषण में कहा, "मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने 2 हजार करोड़ रुपये उज्जैन सिंहस्थ के लिए रखे हैं। उज्जैन उन पर अभिमान करता है। उज्जैन को गर्व है कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री उज्जैन से है। लेकिन, आज उज्जैन का किसान बहुत डरा और परेशान है। क्योंकि, सिंहस्थ के नाम पर उसकी जमीन पहले केवल 3-6 महीनों के लिए अधिग्रहित की जाती थी, लेकिन आज उन्हें स्थायी अधिग्रहण का नोटिस दिया गया है।"

मालवीय ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पता नहीं किस अधिकारी ने यह विचार रखा है कि स्पिरिचुअल सिटी (आध्यात्मिक नगरी) बनाएँगे। मैं बताना चाहता हूँ कि स्प्रिचुअलिटी किसी सिटी में नहीं रहती है। वह तो त्याग करने वाले लोगों से होती है। हम कंक्रीट के भवन बनाकर स्पिरिचुअल सिटी नहीं बना सकते।" मालवीय का यह बयान न सिर्फ सरकार के लिए असहज करने वाला था, बल्कि यह पार्टी लाइन से भी हटकर था। उनके इस रुख की विपक्षी कांग्रेस ने भी तारीफ की, लेकिन भाजपा के अंदर यह बयान तूफान बन गया।

सरकार को बैकफुट पर धकेला

मालवीय के इस बयान ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया। उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और इसके लिए जमीन अधिग्रहण एक अहम हिस्सा है। लेकिन मालवीय ने जब स्थायी अधिग्रहण का मुद्दा उठाया, तो यह साफ हो गया कि इस फैसले से किसानों में भारी नाराजगी है। मालवीय का यह कहना कि "स्पिरिचुअल सिटी" बनाने का विचार गलत है, सरकार की योजना पर सीधा हमला था। सूत्रों के मुताबिक, इस बयान के बाद सरकार को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लपक लिया और सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची बात

मालवीय का यह बयान विधानसभा तक सीमित नहीं रहा। इसकी गूंज भोपाल से दिल्ली तक पहुँच गई। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया। पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना था कि मालवीय का यह बयान न सिर्फ सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि पार्टी की एकजुटता को भी कमजोर कर रहा है। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मालवीय को शो-कॉज नोटिस जारी किया।

नोटिस में क्या लिखा?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की ओर से जारी नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि चिंतामणि मालवीय के हालिया बयानों और कृत्यों की वजह से पार्टी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। नोटिस में लिखा गया, "आपके बयान पार्टी लाइन के खिलाफ हैं और इससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। यह पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है।" मालवीय को 7 दिनों के अंदर इस नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है। अगर वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

मालवीय का पक्ष: "मैंने किसानों की बात उठाई"

नोटिस मिलने के बाद चिंतामणि मालवीय ने अपनी बात रखते हुए कहा, "मैंने जो कुछ भी कहा, वह उज्जैन के किसानों की आवाज थी। मैंने अपनी ही सरकार को इसलिए घेरा, क्योंकि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सामने लाऊँ। सिंहस्थ के लिए जमीन का स्थायी अधिग्रहण किसानों के हित में नहीं है। पहले यह अस्थायी तौर पर लिया जाता था, लेकिन अब स्थायी अधिग्रहण का नोटिस देकर किसानों को डराया जा रहा है। मैंने सिर्फ सच्चाई सामने रखी है।" मालवीय ने यह भी कहा कि वे पार्टी के प्रति वफादार हैं, लेकिन किसानों के हक के लिए लड़ते रहेंगे।

पार्टी में अंदरूनी कलह की आहट

यह पहली बार नहीं है जब चिंतामणि मालवीय ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान दिया हो। मालवीय पहले भी कई बार अपने बयानों से विवादों में रहे हैं। 2018 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें दीपावली पर पटाखे जलाने के लिए रात 8 से 10 बजे का समय निर्धारित किया गया था। तब मालवीय ने कहा था, "मैं अपनी दीवाली परंपरागत तरीके से मनाऊँगा और रात 10 बजे के बाद ही पटाखे जलाऊंगा।" उस वक्त भी उनके बयान ने पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया था।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मालवीय का यह रवैया कई नेताओं को पसंद नहीं है। कुछ का मानना है कि वे पार्टी लाइन से हटकर अपनी अलग छवि बनाने की कोशिश करते हैं, जो संगठन के अनुशासन के खिलाफ है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "मालवीय को अपनी बात पार्टी फोरम में रखनी चाहिए थी, न कि विधानसभा में। इससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठते हैं।"

विपक्ष ने कसा तंज

इस मामले में विपक्षी कांग्रेस ने भी चुटकी ली है। कांग्रेस नेता और विधायक महेश परमार ने कहा, "मालवीय जी ने सही मुद्दा उठाया है। यह दिखाता है कि भाजपा सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। लेकिन यह भी साफ है कि भाजपा में अंदरूनी कलह बढ़ रही है। अपनी ही पार्टी के विधायक को नोटिस देना यह दिखाता है कि सरकार दबाव में है।" कांग्रेस इस मुद्दे को अब विधानसभा से सड़क तक ले जाने की तैयारी में है।

सोशल मीडिया पर बहस

मालवीय को नोटिस मिलने की खबर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोग मालवीय के समर्थन में उतरे हैं। एक यूजर ने लिखा, "मालवीय जी ने किसानों की बात उठाई, इसमें गलत क्या है? पार्टी को उनकी बात सुननी चाहिए, न कि नोटिस देना चाहिए।" वहीं, कुछ ने इसे पार्टी अनुशासन का मामला बताते हुए कहा, "अगर मालवीय को कोई शिकायत थी, तो उन्हें पार्टी फोरम में बात रखनी चाहिए थी, न कि सार्वजनिक मंच पर।"

मालवीय का सियासी सफर

चिंतामणि मालवीय का सियासी सफर काफी लंबा रहा है। वे 2014 में उज्जैन लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे, जहां उन्होंने कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू को 3,09,663 वोटों से हराया था। मालवीय ने 2023 के विधानसभा चुनाव में आलोट (एससी) सीट से जीत हासिल की। वे एक शिक्षित और मुखर नेता के तौर पर जाने जाते हैं। मालवीय ने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से पीएचडी की है और उनकी छवि एक सामाजिक कार्यकर्ता और प्रोफेसर की रही है। लेकिन उनके बयान अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि मालवीय इस नोटिस का जवाब कैसे देते हैं। अगर वे पार्टी को संतुष्ट नहीं कर पाए, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी उन्हें निलंबित करने तक का कदम उठा सकती है। दूसरी ओर, मालवीय के समर्थक मानते हैं कि वे अपने रुख पर अड़े रहेंगे। यह मामला न सिर्फ भाजपा की अंदरूनी सियासत को प्रभावित करेगा, बल्कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर भी असर डाल सकता है।

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