Bhopal News: परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से एलपीजी से चल रही 6 गाड़ियां जब्त, इतना वसूला जुर्माना
Bhopal News: राजधानी भोपाल में परिवहन विभाग ने बुधवार को एक विशेष अभियान के तहत अवैध रूप से एलपीजी गैस से संचालित 6 वाहनों को जब्त कर लिया।
इन वाहन मालिकों से कुल 18,000 रुपए जुर्माने की वसूली की गई। यह कार्रवाई क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) भोपाल के निर्देश पर परिवहन सुरक्षा स्क्वॉड द्वारा की गई।

क्या है मामला?
बुधवार को चलाए गए अभियान में तीन अलग-अलग टीमों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गश्त करते हुए एलपीजी किट से चलने वाले वाहनों की जांच की। इस दौरान पाया गया कि 6 वाहन बिना अनुमोदन और वैध अनुमति के एलपीजी ईंधन का उपयोग कर रहे थे, जो कि सुरक्षा मानकों और मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है।
इन सभी गाड़ियों को आरटीओ कार्यालय परिसर में खड़ा करवा दिया गया है, जहां इनकी जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
नियमों की अनदेखी पर होगी कड़ी कार्रवाई
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलपीजी किट का अवैध उपयोग न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है। यदि किसी वाहन में बिना स्वीकृति के एलपीजी गैस किट लगाई जाती है, तो उसमें आग लगने या विस्फोट की आशंका भी बढ़ जाती है।
इसके अलावा, अभियान के दौरान अन्य नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत इन पर अलग-अलग जुर्माने लगाए गए। कुल मिलाकर इस विशेष कार्रवाई में 18 हजार रुपए की वसूली की गई।
क्यों खतरनाक है अवैध एलपीजी किट?
- बिना आरटीओ की अनुमति के लगाई गई गैस किट अनुमोदित नहीं होती, जिससे फायर सेफ्टी मानकों का उल्लंघन होता है।
- खराब फिटिंग और घटिया सिलेंडर से वाहन में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
- दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनियां भी क्लेम देने से इनकार कर सकती हैं।
Bhopal News: क्या बोले अधिकारी?
एक परिवहन अधिकारी ने कहा, "हम जनता से अपील करते हैं कि वाहन में एलपीजी या सीएनजी किट लगवाने से पहले आरटीओ से स्वीकृति लें और मान्यता प्राप्त फिटमेंट सेंटर से ही यह काम कराएं। गैर-लाइसेंसीड गैस किट न केवल गैरकानूनी है, बल्कि आपकी जान के लिए भी खतरा बन सकती है।"
Bhopal RTO की कार्रवाई: नियम और प्रक्रिया
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भोपाल (MP-04) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत सड़क पर चलने वाले सभी वाहनों की सुरक्षा और वैधता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। RTO भोपाल के अधिकारियों ने बताया कि अनधिकृत एलपीजी वाहनों के खिलाफ यह कार्रवाई नियमित जांच का हिस्सा है, जिसे और तेज किया जाएगा। जब्त किए गए वाहनों की तकनीकी जांच की जाएगी, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे दोबारा सड़क पर तभी उतरें, जब वे सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करें।
RTO नियमों के अनुसार, वाहनों में एलपीजी किट स्थापित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है:
- RTO से अनुमोदन: वाहन मालिक को एलपीजी किट स्थापित करने से पहले RTO से अनुमति लेनी होगी।
- प्रमाणित किट: केवल RTO द्वारा प्रमाणित और BIS (Bureau of Indian Standards) अनुमोदित एलपीजी किट का उपयोग किया जा सकता है।
- वाहन पंजीकरण में संशोधन: एलपीजी किट स्थापना के बाद, वाहन के पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC) में ईंधन प्रकार को अपडेट करना अनिवार्य है।
- नियमित जांच: एलपीजी वाहनों की समय-समय पर तकनीकी जांच और उत्सर्जन परीक्षण करवाना आवश्यक है।
जिन वाहनों को बुधवार को जब्त किया गया, उनमें से किसी ने भी इन नियमों का पालन नहीं किया था। अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर वाहनों में घरेलू 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर पाए गए, जो वाहनों के लिए असुरक्षित हैं।
भोपाल में एलपीजी और सड़क सुरक्षा का परिदृश्य
भोपाल में एलपीजी का उपयोग मुख्य रूप से घरेलू और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। Goodreturns के अनुसार, 11 अप्रैल 2025 को भोपाल में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 858.50 रुपये और 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 1,767.00 रुपये थी। हालांकि, घरेलू सिलेंडरों का वाहनों में उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि यह सिलेंडर सब्सिडी योजना का भी दुरुपयोग है।
भोपाल में सड़क सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा रहा है, खासकर तब, जब शहर में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। RTO भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, शहर में 2024 तक लगभग 10 लाख वाहन पंजीकृत थे, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा ऑटो-रिक्शा और छोटे व्यावसायिक वाहन हैं। इनमें से कई वाहन चालक ईंधन लागत को कम करने के लिए अनधिकृत एलपीजी का उपयोग करते हैं, जो सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस तरह की चेकिंग आगे भी जारी रहेगी। विशेषकर उन वाहनों पर नजर रखी जाएगी, जो गैस किट से संचालित हैं लेकिन उनके पास अनुमोदन या वैध पेपर्स नहीं हैं। विभाग का कहना है कि जन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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