Dhar Bhojshala: भोजशाला को लेकर पूर्व ASI अधिकारी का दावा, जानिए सरस्वती मंदिर को लेकर क्या बोले केके मुहम्मद?
Dhar Bhojshala News: देश में एक तरफ वाराणसी की ज्ञानवापी का मुद्दा चर्चाओं में हैं तो दूसरी तरफ अब मध्य प्रदेश के धार के स्थित भोजशाला के मामले ने सुर्खियां पकड़ी हुई है। भोजशाला में ASI का सर्वे का काम भी हो चुका है। इस बीच प्रख्यात पुरातत्वविद् केके मुहम्मद ने दावा किया वो सरस्वती मंदिर था।
पुरातत्व सर्वे के मुखिया रहे और देश के जाने माने आर्कियोलॉजिस्ट पद्मश्री केके मोहम्मद ने दावा करते हुए कहा कि कि धार की भोजशाला सरस्वती माता का मंदिर था। जिसे बाद में इस्लामी इबादत स्थल में तब्दील किया गया।

'भोजशाला सरस्वती माता का मंदिर था'
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में केके मोहम्मद ने कहा कि धार की भोजशाला सरस्वती माता का मंदिर था। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों को कोर्ट के फैसले का पालन करना चाहिए और ऐसे स्थानों पर मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत करने के साथ, पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का सम्मान करना चाहिए।
इसी के साथ केके मुहम्मद ने कहा कि मुसलमानों को भी मथुरा और काशी को लेकर हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर, कृष्ण मन्दिर, ज्ञानव्यापी या फिर काशी के मंदिर, ये सब हिंदुओं के लिए वही स्थान रखते हैं जो मुसलमान के लिए मक्का मदीना है।
कोर्ट के निर्देश पर चल रहा सर्वेे
बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट निर्देशों के बाद सर्वे का काम चल रहा है। हाई कोर्ट ने 11 मार्च को एएसआई को भोजशाला परिसर का छह हफ्ते के भीतर 'वैज्ञानिक सर्वे' करने का निर्देश दिया था। रविवार को एएसआई सर्वे का तीसरा दिन था।
हिंदुओं का मानना है कि यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद कहता है। आपको बता दें कि केकेमुहम्मद 1976-77 में अयोध्या में प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व वाली पहली खुदाई टीम का हिस्सा थे। जिसको लेकर उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने पहली बार बाबरी ढांचे के नीचे राम मंदिर के अवशेष देखे गए थे।












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