क्या उज्जैन के बाद अशोकनगर का मिथक तोड़ेंगे नये CM मोहन यादव? जो भी आया उसे सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी

Mohan Yadav CM: मध्य प्रदेश के अशोकनगर विधानसभा को लेकर एक मिथक है जिसमें कहा जाता है, की जो भी सीएम अशोक नगर आता है।सीएम की कुर्सी उसी को गंवानी पड़ती है।

ऐसे में कई पूर्व मुख्यमंत्री है। जिनके अशोक नगर आने से उनकी कुर्सी चली गई। लेकिन अब मध्य प्रदेश के नए सीएम मोहन यादव क्या इस अशोकनगर से जुड़े मिथक को तोड़ेंगे। जिसको लेकर अब जिला अध्यक्ष भाजपा ने उन्हें मिलकर आमंत्रित किया है।

Mohan Yadav CM:

मध्य प्रदेश में अशोकनगर जिले को लेकर एक मिथक है। जिसमें कहा जाता है कि जो भी सीएम अशोकनगर आता है उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती है। लेकिन अब एमपी के नए सीएम के रूप में मोहन यादव पदभार सामान लिया है‌। सामान्य वाले मोहन यादव की कार्यशैली और उज्जैन में रात रुक कर उन्होंने यह मिथक तोड़ दिया की उज्जैन में मुख्यमंत्री रात गुजार सकते हैं और फिर अब इसी तरह का मिथक अशोकनगर को लेकर है। जिसे भी आगामी समय में नए सीएम मोहन यादव तोड़ सकते हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष आलोक तिवारी के अनुसार हमारे नवनिर्वाचित सीएम पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। जिसको लेकर हमारी भी इच्छा भी थी कि वह अशोकनगर आए। यहां कुछ योजनाओं के क्रियान्वयन भूमि पूजन और शिलान्यास उद्घाटन में वह हिस्सा लेंगे और आम लोगों से भी मुलाकात करेंगे और हमने स्वयं व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनसे निवेदन किया है, कि वह अशोकनगर पधारे और निश्चित रूप से उन्होंने आश्वासन दिया है। जिसको लेकर मेने एक कार्य योजना भी तैयार की है। सबसे पहले वह शहर के राजराजेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे इसके बाद दूसरे कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।

राजनीतिक पंडितो की माने तो सन 1975 में जब कांग्रेस की सरकार थी तब प्रकाश चंद्र सेठी एमपी के सीएम रहते हुए अशोकनगर में एक अधिवेशन में आए इसके कुछ दिन बाद ही राजनीतिक कारणों से उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी। 1977 में श्याम चरण शुक्ला भी शहर के तुलसी सरोवर के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे। जिसके 2 साल बाद राष्ट्रपति शासन लगने के बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी।

1985 में अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए वह भी अशोकनगर विधानसभा के दौरे पर आए इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटकर पंजाब का गवर्नर बना दिया गया।तो वही 1988 में मोतीलाल गोरा एमपी के सीएम थे और वह माधवराव सिंधिया के साथ शहर के रेलवे फुटओवर ब्रिज का लोकार्पण करने पहुंचे इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा।

1992 में सुंदरलाल पटवा को भी अशोकनगर दौरे पर आने के बाद अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया और देश में राष्ट्रपति शासन लग जाने की वजह से अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। वही 2001 में सिंधिया के प्रचार के लिए आए तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह को भी 2003 में अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।

सीएम शिवराज सिंह चौहान एमपी में मुख्यमंत्री के रूप में 20 साल पूरे कर चुके हैं लेकिन वह मुख्यमंत्री रहते हुए कभी भी अशोकनगर नहीं आए वह हमेशा अशोकनगर से दूरी बनाए रहे। साथी जब भी मुख्यमंत्री अशोक नगर दौरे पर आए तो वह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद चले गए लेकिन जिला मुख्यालय पर कभी नहीं आए।

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