फर्जी जाति प्रमाण पत्र की दम पर कर रहे थे पुलिस की नौकरी, हुई कार्रवाई

दतिया में 5 पुलिसकर्मियों के जाति प्रमाण पत्र निकले फर्जी, सिटी कोतवाली में दर्ज की गई एफआईआर।

दतिया, 31 मई। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पुलिस की नौकरी पाने वाले 5 पुलिसकर्मियों पर दतिया में कार्रवाई की गई है। इन सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के साथ ही इनके खिलाफ सिटी कोतवाली में एफआइआर भी दर्ज कराई गई है।

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फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा कर 5 लोगों ने पुलिस की नौकरी हासिल कर ली थी। भिंड के लहार और ग्वालियर में फर्जी जाति का प्रमाण तैयार करवाया गए और इन प्रमाण पत्र के दम पर पुलिस में नौकरी हासिल कर ली। फर्जीवाड़ा करने में एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है। फर्जीवाड़ा करने वाले पांच पुलिसकर्मियों पर सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई।
एक साल पहले की गई थी लिखित शिकायत
जाति प्रमाण पत्र के फर्जीवाड़े की यह शिकायत एक साल पहले लिखित में की गई थी। ग्वालियर निवासी गौरीशंकर राजपूत द्वारा यह शिकायत की गई थी। गौरीशंकर राजपूत ग्वालियर में चंद्र नगर के निवासी हैं। उनके द्वारा की गई शिकायत पर से बीते एक साल से जांच चल रही थी। इसी जांच में पांच पुलिसकर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
एक फर्जी जाति प्रमाण पत्र भिंड के लहार से और चार ग्वालियर से हुए जारी
जानकारी के अनुसार फर्जीवाड़ा करने वाले पांच पुलिसकर्मियों में से एक पुलिसकर्मी ने अपना जाति प्रमाण पत्र भिंड के लहार एसडीएम कार्यालय से बनवाना बताया जबकि अन्य चार पुलिसकर्मियों ने अपने जाति प्रमाण पत्र ग्वालियर के एसडीएम कार्यालय से जारी होना बताया। पत्राचार के माध्यम से इस बात का खुलासा हुआ की सभी पांच पुलिसकर्मियों के जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी है।
इन पुलिसकर्मियों ने बनवाया फर्जी जाति प्रमाण पत्र
डीपार थाने में पदस्थ आरक्षक लायक राम मांझी ने अपना फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाया। लायक राम ने यह जाति प्रमाण पत्र भिंड के लहार एसडीएम कार्यालय से बनवाया था, लेकिन जांच के दौरान यह बात सामने आई कि लहार एसडीएम कार्यालय से ऐसा कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।
जबकि आरक्षक खुमान सिंह मांझी, आरक्षक गजराज मांझी, आरक्षक कंचन मांझी और आरक्षक नीतू माझी ने ग्वालियर एसडीएम कार्यालय से अपने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाए थे। पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि इन चारों के जाति प्रमाण पत्र भी पूरी तरह से फर्जी है और इन्हें ग्वालियर एसडीएम कार्यालय से जारी नहीं किया गया है।
पिछड़ा वर्ग के होने पर अनुसूचित जनजाति का बनवाया था फर्जी जाति प्रमाण पत्र
इन पांच पुलिसकर्मियों ने नौकरी हासिल करने के लिए अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया था। यह पांच पुलिसकर्मी ओबीसी वर्ग से आते हैं लेकिन नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने खुद को अनुसूचित जनजाति का होना बताते हुए फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा कर पुलिस में नौकरी हासिल कर ली थी।
जांच के बाद किए गए निलंबित, हुई एफआईआर दर्ज
पुलिस द्वारा एक साल तक चली इस जांच में पांच पुलिसकर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर सभी पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी के खिलाफ दतिया की सिटी कोतवाली में धारा 420 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर भी दर्ज की गई है।
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